ईश्वर को देखा
ईश्वर को किसी ने प्रत्यक्ष नहीं देखा, पर वह हर ओर विद्यमान है। साँसों की लय, धड़कनों की गति, सूरज की रोशनी, चाँद की चाँदनी, फूलों की मुस्कान और नदी की रागिनी—सब उसी विराट ऊर्जा के रूप हैं। हम सभी उसी अनंत चेतना के कण हैं, जो समय के साथ बहते रहते हैं। मोक्ष कोई शून्य नहीं, बल्कि जीवन का सार है, जो सृष्टि से तादात्म्य स्थापित करने पर मिलता है। जब हृदय में करुणा, प्रेम और संवेदना खिलते हैं, तभी ईश्वर का सच्चा अनुभव होता है।
