हिंदी लघुकथा
पेटीएम है…
अंजलि दिल्ली लौटते समय सब्जियाँ खरीदती है. छुट्टे पैसे न होने पर जब वह सामान लौटाने लगती है, सब्जी वाली अम्मा का सहज जवाब ‘पेटीएम है’ कहानी को एक दिलचस्प मोड़ देता है.
सुकून
होटल में बैठा एक परिवार तरह-तरह की रोटियों का ऑर्डर दे रहा था। तभी पिता बाहर मिली एक भूखी वृद्धा का ज़िक्र करते हैं, जो केवल एक सूखी रोटी की आस लगाए बैठी थी। यह सुनकर बेटा चुपचाप अपनी प्लेट से रोटियाँ लेकर बाहर चला जाता है। लौटते समय उसके शब्द सभी के दिल को छू लेते हैं रोटी का असली स्वाद उसकी किस्म में नहीं, बल्कि किसी भूखे का पेट भरने के बाद मिलने वाले सुकून में होता है।
‘सबक’
‘सबक’ एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो यह बताती है कि संवेदना और कृतज्ञता केवल इंसानों की नहीं, पशुओं की भी पहचान होती है। गंगू चाची के स्नेह और सम्मान का ऋण चुकाने के लिए शेरू अन्याय का डटकर सामना करता है। यह कहानी केवल एक कुत्ते की वफ़ादारी नहीं, बल्कि महिला सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और गलत के खिलाफ खड़े होने का सशक्त संदेश भी देती है। अंत में पाठक के मन में यही प्रश्न रह जाता है कि असली इंसानियत किसमें है इंसान में या उस बेजुबान में?
