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दशहरे पर शराब छोड़ने के बाद पिता का आशीर्वाद लेता बेटा

विजय

शराब की लत ने पवन से उसका मान-सम्मान छीन लिया था, लेकिन एक दिन उसने खुद को बदलने का संकल्प लिया। क्या परिवार का विश्वास फिर लौट पाएगा? पढ़िए बदलाव, उम्मीद और रिश्तों की मिठास से भरी लघुकथा ‘विजय’।

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रिश्तों में विश्वासघात से दुखी महिला की भावनात्मक तस्वीर

चोर

क्या चोर केवल वही होते हैं, जो घरों से सामान चुराते हैं? कभी-कभी अपने ही किसी के जीवन की सबसे अनमोल खुशियाँ और रिश्ते छीन लेते हैं। ‘चोर’ विश्वासघात, रिश्तों की टूटन और मन की अनकही पीड़ा को उजागर करती एक संवेदनशील कहानी है।

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नदी के किनारे बैठी श्वेता, जो विरह की पीड़ा से निकलकर नई शुरुआत के बारे में सोच रही है।

‘रिहाई’

क्या किसी प्रियजन की स्मृतियों के साथ जीते हुए भी जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है? ‘रिहाई’ की श्वेता को नदी के सहज प्रवाह से इस सवाल का उत्तर मिलता है। यह कहानी विरह, स्मृतियों, आत्ममुक्ति और नई शुरुआत की प्रेरक यात्रा है।

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सरकारी नौकरी मांगते मदन के सामने बैठे नेता जी, राजनीतिक व्यंग्य लघुकथा ‘डिग्री’ का दृश्य

डिग्री

नेता की सेवा में दिन-रात लगे मदन को उम्मीद है कि उसके बदले उसे पक्की नौकरी मिल जाएगी। लेकिन सरकारी नौकरी के लिए नेता जी के जवाब में छिपा व्यंग्य पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर देता है।

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सब्जी के ठेले पर खरीदारी करती अंजलि और बुजुर्ग सब्जी विक्रेता

पेटीएम है…

अंजलि दिल्ली लौटते समय सब्जियाँ खरीदती है. छुट्टे पैसे न होने पर जब वह सामान लौटाने लगती है, सब्जी वाली अम्मा का सहज जवाब ‘पेटीएम है’ कहानी को एक दिलचस्प मोड़ देता है.

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होटल के बाहर भूखी वृद्धा को रोटी देता हुआ एक बच्चा – इंसानियत पर आधारित भावुक हिंदी लघुकथा

सुकून

होटल में बैठा एक परिवार तरह-तरह की रोटियों का ऑर्डर दे रहा था। तभी पिता बाहर मिली एक भूखी वृद्धा का ज़िक्र करते हैं, जो केवल एक सूखी रोटी की आस लगाए बैठी थी। यह सुनकर बेटा चुपचाप अपनी प्लेट से रोटियाँ लेकर बाहर चला जाता है। लौटते समय उसके शब्द सभी के दिल को छू लेते हैं रोटी का असली स्वाद उसकी किस्म में नहीं, बल्कि किसी भूखे का पेट भरने के बाद मिलने वाले सुकून में होता है।

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एक भारतीय गली में खड़ा वफ़ादार देसी कुत्ता गुस्से से एक शराबी व्यक्ति की ओर भौंक रहा है, जबकि पास में एक वृद्ध महिला सुरक्षित खड़ी है। दृश्य साहस, सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है।

‘सबक’

‘सबक’ एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो यह बताती है कि संवेदना और कृतज्ञता केवल इंसानों की नहीं, पशुओं की भी पहचान होती है। गंगू चाची के स्नेह और सम्मान का ऋण चुकाने के लिए शेरू अन्याय का डटकर सामना करता है। यह कहानी केवल एक कुत्ते की वफ़ादारी नहीं, बल्कि महिला सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और गलत के खिलाफ खड़े होने का सशक्त संदेश भी देती है। अंत में पाठक के मन में यही प्रश्न रह जाता है कि असली इंसानियत किसमें है इंसान में या उस बेजुबान में?

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पुनर्मिलन: दो साल बाद पार्क में मिला प्लेन क्रैश में खोया पति

पुनर्मिलन

कभी-कभी प्रेम उम्मीद का दूसरा नाम होता है। प्लेन क्रैश में मृत मान लिया गया राघव, दो साल बाद अपनी पत्नी प्रीति को उसी पार्क में मिलता है, जहां उनके प्यार की शुरुआत हुई थी। यह कहानी बिछड़ने, इंतजार और चमत्कारिक पुनर्मिलन की एक भावनात्मक यात्रा है।

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