रिश्ते
तुम सपने ज़रूर देखना…
यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.
कुछ पुरुष ऐसे भी होते हैं
कुछ पुरुष रिश्ते बड़ी आसानी से बनाते हैं और उतनी ही सहजता से तोड़ भी देते हैं. बिना किसी स्पष्टीकरण, बिना किसी टकराव के वे चुप्पी को हथियार बनाकर स्त्री को खुद ही रिश्ते से बाहर निकलने को विवश कर देते हैं. यह लेख उसी मौन छल, टूटते विश्वास और उस स्त्री की मानसिक पीड़ा की कहानी है, जो प्रेम को ईश्वर मान बैठती है और अंत में स्वयं को ठगा हुआ पाती है.
क्रान्ति
ह कविता तात्कालिक सुख और अधैर्य से भरी दुनिया के बीच धैर्य, साधना और विचार की क्रान्ति का घोष है। रिश्तों को मौसमी फल-फूल नहीं, बल्कि चिनार और आम जैसे दीर्घजीवी वृक्ष मानते हुए यह रचना बताती है कि सच्चा परिवर्तन समय, सतत प्रयास और विश्वास से जन्म लेता है और वही विचारों की वास्तविक क्रान्ति है।
पुश्तैनी घर
पुश्तैनी घर ईंट-पत्थर नहीं होते, वे पीढ़ियों की साँसें सँजोए रहते हैं। उनकी दीवारों में हँसी की गूँज, डाँट की तपिश और रिश्तों की गर्माहट कैद रहती है। जब हम उन्हें छोड़ देते हैं, वे धीरे-धीरे खंडहर नहीं, मौन पीड़ा में बदलते हैं जीते-जी मरते हुए।
सीमाओं के भीतर उड़ान
वह किसी पोस्टर पर छपी निडर स्त्री नहीं थी. न ही हर बहस में आगे बढ़कर अपनी ताक़त साबित करने वाली कोई प्रतीकात्मक नायिका. अनन्या उन अनगिनत महिलाओं में से एक थी, जिनकी शक्ति शोर नहीं करतीवह संतुलन रचती है.
आधा केक, पूरी खुशी
यह कहानी एक बच्चे के मन में छिपे लालच से शुरू होकर संवेदना और बाँटने की सीख तक पहुँचती है। सड़क किनारे मजदूर बच्चों को बिस्किट बाँटते देख उसका मन बदल जाता है और वह समझ पाता है कि खुशी जमा करने में नहीं, बाँटने में है।
माँ : जो हर अक्स में खुदा
माँ जो बिना कहे हर दुख समेट लेती है और हर सुख में चुपचाप पास खड़ी रहती है। माँ की उपस्थिति यहाँ दूरी से परे, स्मृति और आत्मा में रची-बसी हुई है—ऐसी शक्ति जो कभी जुदा नहीं होती।
माँ तो माँ होती है…
माँ का साथ शब्दों का मोहताज नहीं होता। कभी वह धूप में छाता बन जाती है, तो कभी जीवन की भीड़ में सहारा। उम्र भले ही शरीर पर अपना असर छोड़ दे, पर माँ की मौजूदगी वही सुकून देती है. निःशब्द, निःस्वार्थ और पूरी तरह सुरक्षित। माँ के साथ बिताया हर पल स्मृति बनकर जीवन भर साथ चलता है
