यादें तुम्हारी शामिल रहेंगी
कुछ यादें समय के साथ धुंधली नहीं होतीं. यह भावपूर्ण रचना प्रेम, विरह, अधूरी बातों और उन यादों को शब्द देती है, जो हमेशा दिल में शामिल रहती हैं.

कुछ यादें समय के साथ धुंधली नहीं होतीं. यह भावपूर्ण रचना प्रेम, विरह, अधूरी बातों और उन यादों को शब्द देती है, जो हमेशा दिल में शामिल रहती हैं.
ख़यालों में बार-बार लौटते प्रेम, ख़ामुश इशारों और बीते माज़ी की यादों को शब्द देती यह ग़ज़ल दिल के अनकहे एहसासों की खूबसूरत अभिव्यक्ति है।
कभी क्रिकेट के मैदान में अपनी स्पिन गेंदों से दोस्तों को छेड़ने वाला, तो कभी अपनी हँसी और शरारतों से हर महफ़िल को जीवंत बना देने वाला गिरधारी अरोरा अब सिर्फ़ यादों में बस गया है। कॉलेज के दिनों की दोस्ती, जनता एक्सप्रेस के सफ़र, महिदपुर रोड की गलियाँ और अनगिनत शरारतें आज भी दिल में ज़िंदा हैं। यह संस्मरण एक ऐसे दोस्त को श्रद्धांजलि है, जिसके जाने से यादों का एक पूरा दौर हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।
तीन दिन, एक शहर और उम्र भर की यादें” राघव और रिद्धिमा की ऐसी भावनात्मक प्रेम कहानी है, जिसमें एक छोटी-सी मुलाकात जीवनभर की स्मृतियों में बदल जाती है। अदरक वाली चाय, मेहंदी में छिपा नाम, छत पर बिताई तारों भरी रात और स्टेशन पर बिछड़ने का दर्द ये छोटे-छोटे पल उनके रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी बन जाते हैं। यह कहानी बताती है कि सच्चे रिश्तों में दूरी मायने नहीं रखती, क्योंकि कुछ मुलाकातें समय से नहीं, दिल से जुड़ी होती हैं।
कुछ दोस्त जीवन से कभी नहीं जाते, वे सिर्फ आँखों से ओझल हो जाते हैं। फ्रेंडशिप डे पर दो दिवंगत मित्रों पारस बोथरा और डॉ. रामगोपाल गुप्ता को समर्पित यह संस्मरण सच्ची दोस्ती, अपनापन और उन यादों की कहानी है जो समय के साथ और गहरी होती जाती हैं। यह लेख हर उस पाठक को अपने किसी बिछड़े दोस्त की याद दिलाएगा।
फ्रेंडशिप डे के अवसर पर स्वर्गीय फकीरचंद कसेरा को समर्पित यह भावपूर्ण संस्मरण सच्ची मित्रता, विश्वास, अपनापन और जीवनभर साथ रहने वाली यादों का मार्मिक चित्रण है. सामाजिक जीवन में उनके योगदान, सरल व्यक्तित्व और मित्रता के अनमोल रिश्ते को शब्दों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई है.
नीम के पेड़ से झाँकता हुआ चाँद सिर्फ़ आसमान का चाँद नहीं, बल्कि समय का मौन साक्षी है। जून की तपती रात में चारपाई पर लेटी एक स्त्री अपनी स्मृतियों, रिश्तों और बदलती पीढ़ियों की यात्रा को चाँद से साझा करती है। यह रचना जीवन के बदलते पड़ावों की मार्मिक अनुभूति कराती है।