ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं
विदेश में सफलता की तलाश में मोहन अपने परिवार और घर से दूर हो गया। वर्षों बाद लौटने पर उसे एहसास हुआ कि पैसों से बड़ी दौलत उसके पिता, परिवार और उसी घर में उसका इंतजार कर रही थी।

विदेश में सफलता की तलाश में मोहन अपने परिवार और घर से दूर हो गया। वर्षों बाद लौटने पर उसे एहसास हुआ कि पैसों से बड़ी दौलत उसके पिता, परिवार और उसी घर में उसका इंतजार कर रही थी।
कभी-कभी छोटी-सी मदद इंसान के दिल में ऐसी जगह बना लेती है, जिसे वर्षों बाद भी भुलाया नहीं जा सकता। यह कहानी एक गरीब मोची के बड़े दिल और उसकी सच्ची इंसानियत की मार्मिक याद है।
जब मोहब्बत करने वाले दो लोग इस दुनिया में नहीं रहे, तब उनकी प्रेम कहानी एक ऐसी लड़की की आँखों में ज़िंदा रह गई, जिसने कभी उन्हें जाना तक नहीं था।
पोते रवि के लौटने से श्याम बाबू की सूनी जिंदगी में खुशियाँ लौट आती हैं, लेकिन पुराने घर की दीवारें उन्हें उस बेटे मोहन की याद दिलाती हैं, जिसका आज भी इंतजार है।
गरीबी और संघर्षों के बीच पली शगुन ने मेहनत के दम पर अपने माता-पिता के लिए सपनों का घर बनाया. लेकिन प्रेम और विवाह के सवाल पर उसका मन अब भी उलझा हुआ था. एक घटना ने उसके रिश्ते को नई दिशा दे दी.
वाणी को गए दो साल हो चुके थे, लेकिन सारंग उसे भूल नहीं पाया था। फिर एक दिन उसे 52 लिफाफों वाला एक डिब्बा मिला, जिसे वाणी उसके लिए छोड़ गई थी। हर रविवार खुलने वाला एक लिफाफा उसे धीरे-धीरे फिर से जीना सिखाने लगा।