स्थानांतरण
हर बार एक अनजाने शहर में पहुँचकर लोगों के बीच अपना बन जाना और फिर दूसरे शहर की ओर चल देना. ‘स्थानांतरण’ कविता बदलते शहरों और बनते रिश्तों की भावनात्मक कहानी है.

हर बार एक अनजाने शहर में पहुँचकर लोगों के बीच अपना बन जाना और फिर दूसरे शहर की ओर चल देना. ‘स्थानांतरण’ कविता बदलते शहरों और बनते रिश्तों की भावनात्मक कहानी है.
“बदलते रिश्ते” एक ऐसी भावनात्मक कहानी है, जो बताती है कि कभी-कभी जिस रिश्ते से हम सबसे अधिक उम्मीद करते हैं, वही हमें अकेला छोड़ देता है। वहीं कोई अनजाना व्यक्ति अपनी संवेदनशीलता और अपनापन से हमारे दर्द को समझकर जीवन में सुकून की वजह बन जाता है।
खिड़की पर आकर चहकती गौरैया केवल एक पक्षी नहीं लगती, बल्कि जीवन की जिद और आशा का जीवंत रूप प्रतीत होती है। नन्ही चोंच में तिनके दबाए वह जैसे हर बार याद दिलाती है कि टूटे हुए घोंसले भी फिर से बसाए जा सकते हैं। उसकी चपल उड़ान और निरंतर प्रयास उस मन से संवाद करते हैं, जो उदासी और पीड़ा के बोझ तले थक चुका है। यह कविता गौरैया के माध्यम से जीवन, आशा और भीतर फिर से घर बनाने की इच्छा को संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती है।
यह कविता गहरे भावनात्मक घावों और टूटे हुए विश्वास की कहानी कहती है। इसमें एक ऐसे मन की पीड़ा झलकती है जिसने बार-बार ठोकरें खाकर यह सीखा कि अंधी करुणा और बिना सोचे समझे अपनापन देना स्वयं के लिए विनाशकारी हो सकता है। जीवन के कठोर अनुभवों ने उसे भीतर से मजबूत तो बनाया, लेकिन साथ ही उसके जज़्बातों पर एक स्थायी परत भी चढ़ा दी, जहाँ अब संवेदनाएँ नियंत्रित हैं और विश्वास सीमित।
यह लेख जीवन के विभिन्न पड़ावों बचपन, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था के माध्यम से बताता है कि हर उम्र अपने आप में खास होती है और हमें जीवन को समझने का एक नया दृष्टिकोण देती है।
यह कविता मन की गहराइयों में उठते भावनाओं के सैलाब को नदी के रूपक के माध्यम से व्यक्त करती है। कभी शांत तो कभी उफनती यह मन की धारा जीवन के संघर्ष, पीड़ा और प्रतीक्षा को अपने साथ बहा ले जाती है। घाट, शिवलिंग, मणिकर्णिका और लहरों के प्रतीक इस यात्रा को आध्यात्मिक और यथार्थ दोनों रूपों में प्रस्तुत करते हैं। यह रचना केवल भावनाओं का प्रवाह नहीं, बल्कि अस्तित्व की खोज, टूटन और समर्पण का भी चित्रण है, जहाँ अंततः प्रतीक्षा भी थककर समाप्त हो जाती है।