गोल्डन टेम्पल मेल अब बांद्रा से ही चलेगी
गोल्डन टेम्पल मेल का टर्मिनल बदलाव अगले छह माह तक जारी रहेगा. ट्रेन संख्या 12903 और 12904 अब मुंबई सेंट्रल के बजाय बांद्रा टर्मिनस से ही संचालित होंगी. यात्रा से पहले अपडेट जरूर देखें.

गोल्डन टेम्पल मेल का टर्मिनल बदलाव अगले छह माह तक जारी रहेगा. ट्रेन संख्या 12903 और 12904 अब मुंबई सेंट्रल के बजाय बांद्रा टर्मिनस से ही संचालित होंगी. यात्रा से पहले अपडेट जरूर देखें.
धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बचाय अपने चिकित्सकीय प्रोफेशन को सर्वोपरि मानते हुए चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि दिवेकर ने अपनी माता सुशीला दिवेकर की पार्थिव देह दान कर दी। इससे पहले 77 वर्षीय दिवेकर के नेत्रदान भी कराए गए। प्रशासन और पुलिस ने ऐसी देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इसे अनुकरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली घटना बताया।
यह कहानी एक ऐसे बुज़ुर्ग व्यक्ति की त्रासदी है जिसने जीवन भर अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, लेकिन जीवन की साँझ में अकेलापन, उपेक्षा और भूख उसके हिस्से आई। यह लेख समाज से सवाल करता है क्या पुरुष का दर्द सचमुच अदृश्य होता है?
एक रात प्रेम और साथ से भरी थी, दूसरी रात सिर्फ़ स्मृतियों और मीठी टीस के साथ रह गई. यह कविता बीते प्रेम की उसी कसक को शब्द देती है.
यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई और दिल की कश्मकश को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। हर शेर में बिछड़ने का दर्द, इंतजार और यादों की टीस झलकती है, जो पाठक को भावनाओं की गहराई में डूबने पर मजबूर कर देती है।
मां के बहुत कहने पर उसने बाबा के सामने हथेली फैलाई। बाबा ने ध्यान से रेखाएँ देखीं और मुस्कराए
“अरे वा! बहुत सुंदर रेखाएँ हैं बिटिया, खूब सुख-संपत्ति और अच्छा पति मिलेगा।” वह अचानक बीच में बोल उठी—“विद्या की रेखा कहाँ है मेरे हाथ में, बताइए तो ज़रा?”बाबा ठिठक गए।“बिटिया, तुम्हारे नसीब में सब कुछ है, विद्या को छोड़कर।”उसकी आँखों में चमक आ गई।
कभी-कभी रिश्तों को नाम देना आसान नहीं होता, क्योंकि वे शब्दों से कहीं ज्यादा गहरे और जटिल होते हैं। यह कविता उसी अनकहे रिश्ते की कहानी कहती है, जिसमें दो लोग साथ तो हैं, लेकिन उस साथ की परिभाषा खुद उनसे भी छुपी हुई है। यह रिश्ता आदत भी है, जरूरत भी, और एक ऐसी भावनात्मक डोर भी, जिसे तोड़ना संभव नहीं लगता।
रेखा ने बचपन में जो कहानियाँ लिखना शुरू किया था, वो ज़िंदगी की दौड़ में कहीं खो गया था। लेकिन एक पुरानी सहेली की एक बात ने उसके भीतर की सोई हुई लेखिका को फिर जगा दिया। धूल भरी कॉपी, सूखे फूल, और अधूरी कहानियाँ — सब फिर से ज़िंदा हो उठे। कभी-कभी ज़िंदगी वहीं से शुरू होती है, जहाँ हमें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है।
एक नंगी ईंट की दीवार और उसके पास चूल्हा, जिस पर उपले की आँच में रोटियाँ सिकती हैं। माँ के पास चिमटा तो है, फिर भी कभी-कभी ऐसा लगता है कि उसके जीवन से कुछ पल चुराए जाएँ। उसकी तपती ज़िंदगी, खुरदरी हथेलियाँ और जीवन की सारी सिलवटें यह सब गहरी कहानियाँ बयां करती हैं। समय तो गुजर चुका है, लेकिन जो आँसू उसने छुपाए थे, उन्हें समझने और पोछने की इच्छा रहती है। यह एक नज़दीकी और भावनात्मक दृष्टिकोण है, जिसमें माँ के संघर्ष और उसके भीतर छुपी कोमलता दोनों ही सामने आती हैं।
उत्तर प्रदेश के एटा जिले की ऐतिहासिक रिज़ोर रियासत की अंतिम रानी श्रीमती शशि सिंह अपने विद्वत्ता, समाजसेवा और उदार व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं. सोलहवीं पुण्यतिथि पर उन्हें परिवार और लाइव वायर न्यूज़ की ओर से यह भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित है, जो बुजुर्गों के संस्कार, दादी के महत्व और विरासत में मिले मूल्यों को याद करती है.