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42 साल बाद अपनी बचपन की सहेली के घर पहुँची महिला का भावुक क्षण

अधूरी मुलाक़ात

42 वर्षों बाद बचपन की सहेली से मिलने पहुँची एक महिला अपने साथ ढेरों यादें लेकर आई थी, लेकिन दरवाज़े पर मिला एक सच उसकी पूरी दुनिया को स्तब्ध कर गया। दोस्ती, स्मृतियों और बिछड़न की यह मार्मिक लघुकथा दिल को छू जाती है।

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सिंहस्थ मेले में उज्जैन के नदी घाट के पास विशाल पार्किंग क्षेत्र और श्रद्धालुओं की भीड़

सिंहस्थ 2028 का मेगा पार्किंग प्लान तैयार

सिंहस्थ 2028 के लिए प्रशासन ने भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन का बड़ा खाका तैयार किया है। घाट से 1–2 किमी की परिधि में 3-लेवल पार्किंग बनाई जाएगी, जिसमें 5 से 7 लाख वाहनों की क्षमता होगी। फोर-लेन और सिक्स-लेन मार्गों से जुड़ी पार्किंग, अंडरपास और वैकल्पिक रूट के जरिए श्रद्धालुओं को कम पैदल दूरी और तेज निकासी का अनुभव देने की तैयारी है।

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Asha Bhosle क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर मैच देखते हुए, पृष्ठभूमि में Sachin Tendulkar बल्लेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

स्मृति शेष-क्रिकेट की दीवानी थी आशा भोसले

दिग्गज गायिका Asha Bhosle का क्रिकेट प्रेम भी उतना ही खास रहा है जितना उनका संगीत. ट्विटर जॉइन करते ही उन्होंने सबसे पहले Sachin Tendulkar को फॉलो किया, जबकि बचपन में वह अपनी मां के साथ स्टेडियम में बैठकर पूरे पांच दिनों तक टेस्ट मैच देखा करती थीं.

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भारतीय रेल यात्रा के दौरान परिवार के साथ रखा पारंपरिक बिस्तरबंद

बिस्तरबंद: जब सफ़र में घर साथ चलता था

एक समय था जब हर यात्रा का सबसे भरोसेमंद साथी “बिस्तरबंद” होता था। उसमें सिर्फ बिस्तर नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सहूलियत, बचपन की जिज्ञासाएँ और सफ़र की गर्माहट बंद होती थी। आज भले ही एयरबैग ने उसकी जगह ले ली हो, पर यादों में बिस्तरबंद अब भी ज़िंदा है।

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पंचक: शुभ-अशुभ का रहस्य और धार्मिक महत्व

पंचक वह समय होता है जब चंद्रमा पाँच विशेष नक्षत्रों में रहता है और इस अवधि को हिंदू धर्म में अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यह काल विभिन्न प्रकार का होता है—जैसे रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक आदि—जिनमें कुछ कार्यों को करना वर्जित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय सावधानी बरतकर जीवन की अनेक परेशानियों से बचा जा सकता है।”

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शहर में अपने लापता बेटे की तलाश करती बिहार की एक संघर्षशील माँ

तलाश

बिहार के एक छोटे से गाँव की सावित्री अपने लापता बेटे की तलाश में शहर पहुँच जाती है। अनेक कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद वह हार नहीं मानती और अपनी ममता की ताकत से अपने बेटे को ढूँढ़ निकालती है। यह कहानी माँ के अटूट प्रेम और साहस का अद्भुत उदाहरण है।

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मेरी यायावरी!

मेरी यायावरी ने मुझे एक अनवरत पथगामी बना दिया है, जैसे मैं इस धरा पर रहते हुए भी व्योम का वासी बन गया हूँ। मन को पल भर का चैन नहीं मिलता। स्मृतियों का इतिहास वह निरंतर रचता रहता है और क्षणभंगुर जीवन में नए-नए आकाश गढ़ता रहता है।

कभी यह मन वृक्ष की ऊँची फुनगी पर जा बैठता है, मधुर राग बनकर इतराता है। अगले ही पल जब तेज़ हवा का झोंका आता है तो तंद्रा भंग हो जाती है और यह यथार्थ की ज़मीन पर धड़ाम से गिर पड़ता है।

हर क्षण एक मृदुल तरंग उठती है। शब्दों के घाट पर नंगे पाँव घूमती भावनाएँ अकुलाई-सी मोती चुनती रहती हैं। उन्हीं मोतियों से स्वर्णिम अभिव्यक्तियाँ जन्म लेती हैं और तभी एक नया काव्य आकार पाता है

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अक्षय तृतीया पर सेवा का अनोखा उदाहरण

अक्षय तृतीया पर सेवा, संस्कार और उत्सव का संगम

कांठेड़ परिवार ने अक्षय तृतीया पर गौशाला में सेवा कर जन्मदिन और व्यवसाय की वर्षगांठ को खास अंदाज में मनाकर समाज को प्रेरणादायक संदेश दिया।

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वैवाहिक समारोह में पार्ट टाइम काम करता होटल मैनेजमेंट का मेहनती युवा

नयी उम्मीद

एक वैवाहिक समारोह में मिले मेहनती युवक की प्रेरक कहानी, जो होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा है. यह कहानी आज के युवाओं के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है.

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चीत्कार पर मौन है ज़माना

आज की राजनीति और सत्ता की भूख इतनी बेकाबू हो चुकी है कि उसने जनता की रोटी, ज़मीन और नौकरी तक निगल ली है। शासक वर्ग सबकुछ हड़पने के बाद भी संतुष्ट नहीं होता, मानो उन्हें किसी डकार तक की परवाह नहीं। आम इंसान का संघर्ष, उसका भूख-प्यास से जूझना, उनके लिए महज़ एक आँकड़ा या ख़बर बनकर रह गया है।

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