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यादों के बोझ में खोया एक व्यक्ति, भावनात्मक दर्द और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा

दर्द के पार

कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें न पूरी तरह कहा जा सकता है और न ही भुलाया जा सकता है। लेकिन उन्हें स्वीकार कर, उनसे सीख लेकर और जीवन को नई दिशा देकर आगे बढ़ा जा सकता है। यह लेख भावनात्मक दर्द से उबरने की सकारात्मक राह दिखाता है।

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अरमान

नदी के किनारे खड़े होकर वह लंबे समय तक मटमैले पानी को निहारता रहा। हफ्तों से पानी देखने की आस थी, पर आज जब पानी सामने था तो वह विनाश का दूत बन आया था। अरमान तो बहुत थे—खेत लहलहाने के, फसल कटने की, जीवन संवरने की—पर अब सब कुछ बह चुका था। उसने भारी मन से कहा, “बहुत अरमान थे तुझे… देख ले पानी… जी भर के…”

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संस्कृत भाषा और संस्कृत पत्रिका

एक दिन कुछ बच्चों के बीच बैठी मैं पत्रिकाओं की और उसे पढ़ने की बात कर रही थी। उसी क्रम में मैंने उनसे संस्कृत पत्रिकाओं के बारे में पूछा तो वे हँस पड़े। बोले – “संस्कृत तो यूँ भी डेड भाषा है आंटी! उसकी पत्रिका कैसे निकल सकती है? और कौन पढ़ेगा?”

शायद वे सही कह रहे थे।
आज जब बोलियाँ समय के बहाव में सिर्फ एक भाषा अंग्रेज़ी और शहरीकरण के कारण मर रही हैं, तो वर्षों पहले की संस्कृत पत्रिकाओं को ये बच्चे कैसे जान सकते हैं? कैसे जान सकते हैं कि महर्षि पाणिनि की रची यह भाषा कई भाषाओं की जननी है, जिसे दशम मंडलों की भाषा कहा जाता है, वैदिक भाषा कहा जाता है और जिसे हम देववाणी कहते हैं।

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ग्वालियर में गालव म्यूजिकल ग्रुप की सुरमई शाम

गालव म्यूजिकल ग्रुप द्वारा आयोजित सुरमई शाम का कार्यक्रम इस माह भी बाल भवन में बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हर बार की तरह इस बार भी कार्यक्रम में आम जनता की पसंद के नगमों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे श्रोता झूम उठे। कार्यक्रम का संचालन आशी, प्रतिभा दुबे और वर्षा श्रीवास्तव ने किया।

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मौन प्रेम और अनकहे संबंधों को दर्शाता भावपूर्ण दृश्य

अनुबंध

कुछ संबंध शब्दों के मोहताज नहीं होते। वे मौन में भी बोलते हैं और दूरी में भी धड़कते हैं। ‘अनुबंध’ ऐसी ही प्रेम कविता है, जिसमें पहली मुलाकात, अनकही चाहत, आत्मिक स्पर्श और अधूरे रिश्ते को पूर्णता देने की आकांक्षा अभिव्यक्त हुई है।

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“मन का कोना” गोष्ठी में कविता पाठ करते साहित्यकार, कांदिवली मुंबई

कविता की महफिल में सजी ‘मन का कोना’ गोष्ठी

मुंबई के कांदिवली स्थित ठाकुर कॉम्प्लेक्स में आयोजित “मन का कोना” साहित्यिक गोष्ठी में रचनाकारों ने काव्यपाठ से समां बांध दिया। इस मासिक आयोजन में बढ़ती भागीदारी इसके विस्तार और लोकप्रियता का संकेत दे रही है।

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मोरपंख मुकुट धारण किए बाँसुरी बजाते श्रीकृष्ण का भक्ति भाव से भरा दृश्य

कान्हा तेरी पगड़ी की मोर पांखड़ी बन जाऊँ

कान्हा के प्रति प्रेम और पूर्ण समर्पण की अभिव्यक्ति करती यह भक्ति कविता मोरपंख से लेकर बाँसुरी, पायल और चरणों की धूल बनने की भावपूर्ण कल्पना के माध्यम से कृष्ण-भक्ति को व्यक्त करती है.

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नदी के किनारे बैठी श्वेता, जो विरह की पीड़ा से निकलकर नई शुरुआत के बारे में सोच रही है।

‘रिहाई’

क्या किसी प्रियजन की स्मृतियों के साथ जीते हुए भी जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है? ‘रिहाई’ की श्वेता को नदी के सहज प्रवाह से इस सवाल का उत्तर मिलता है। यह कहानी विरह, स्मृतियों, आत्ममुक्ति और नई शुरुआत की प्रेरक यात्रा है।

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शिक्षण संस्थान बन रहे मौत के घर

देश के कई शिक्षण संस्थान छात्रों के लिए बेहतर जीवन जीने के पाठ सीखने की जगह कम, मौत के घर ज्यादा बनते जा रहे हैं।

छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं समाज की उम्मीदों और नियमों के नीचे दबी खामोश पीड़ा के संकेत हैं।बच्चों को यह नहीं सिखाया जाता है कि असफलता, निराशा या अनिश्चितता से कैसे निपटना है। उन्हें सिर्फ परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाता है, जिंदगी के लिए नहीं।

 इन घटनाओं को अब नजर अंदाज नहीं किया सकता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई बार हिदायतें दी जाती रही हैं लेकिन इस समस्या का समाधान अभिभावक और शिक्षण संस्थानों को भी मिल कर खोजना होगा। क्योंकि मुफ्त में युवा जानें जा रही हैं।

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प्रेम में डूबी एक युवती दीपक, गुलाब और 'Miss You' लिखे कप के साथ अपने प्रिय की यादों में खोई हुई दिखाई दे रही है, जो प्यार, इंतज़ार और मुलाक़ात की भावनाओं को दर्शाती है।

बचा कर रखना थोड़ी खुशी

रिश्तों की सबसे बड़ी पूँजी छोटी-छोटी खुशियाँ होती हैं। यह कविता प्रेम, इकरार, मुलाक़ात और इंतज़ार के उन अनमोल पलों को संजोने का संदेश देती है, जहाँ मुस्कान और अपनापन ही रिश्ते की सबसे सुंदर पहचान बन जाते हैं।

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