चाइनीज मांझे से मौत अब हत्या, लखनऊ केस से भड़के सीएम योगी,

चाइनीज़ मांझा बना कातिल

उत्तर प्रदेश में अब चाइनीज़ मांझे से होने वाली मौत को सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि हत्या माना जाएगा| मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जानलेवा मांझे को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में मर्डर का केस दर्ज किया जा सकता है|

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बेंगलुरु स्टूडियो परिसर में तालाब के पास खड़ा बच्चा, मैटरनिटी फोटोशूट हादसे की प्रतीकात्मक तस्वीर

कैमरा चलता रहा, जिंदगी थम गई

बेंगलुरु के एक निजी स्टूडियो में मैटरनिटी फोटोशूट के दौरान तीन साल के मासूम की तालाब में डूबने से मौत हो गई. सात माह की गर्भवती मां शूट में व्यस्त थी, तभी खेलते-खेलते बच्चा परिसर के तालाब में गिर गया. यह दर्दनाक हादसा सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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सरस्वती वन्दना

यह कविता एक साधिका की अंतरतम पुकार है, जिसमें वह माँ से प्रार्थना करती है कि उसका अंतर्मन शुद्ध, निर्मल और विकारों से रहित हो जाए। वह चाहती है कि उसका प्रत्येक श्वास एक श्रद्धा से भरा पूजन बन जाए, और उसका मन ऐसा हो जैसे मुस्काता हुआ वृंदावन। कविता में भक्ति का भाव सहज रूप से बहता है — कभी वह मन की वीणा पर माँ की महिमा का गीत गाना चाहती है, तो कभी बनमाली को खोजती हुई नंदनवन की ओर बढ़ती है।
कवयित्री अपने जीवन में अवरोधों को दूर कर विश्वास की गली में ‘निवी’ नामक दीप जलाकर गतिमान बनने की आकांक्षा रखती है। यह रचना केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और चेतना के उजास की ओर यात्रा है।

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क्या मैं बहक गई थी…?

मैं बहक गई थी और यह मानने में मुझे कोई अफ़सोस नहीं। जब मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब मेरा पति मुझसे दूर था। उसी खालीपन में एक पुराना प्यार फिर से सामने आया, जिसने मुझे वह अपनापन दिया जो मैं भूल चुकी थी। उस एक सच ने हमारी शादी को तोड़ा नहीं, बल्कि उसे आईना दिखा गया।

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डिब्बे वाले

“सब की भूख का हिसाब रखने वाले, अपनी भूख को कैसे दबा कर रख पाते होंगे?”
यह पंक्ति डिब्बे वालों के जीवन की मार्मिक विडंबना को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है — वे जो दूसरों की भूख मिटाते थे, स्वयं भूखे रह गए।

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जालंधर में बाढ़ का संकट गहराया, कई ट्रेनें रद्द और डायवर्ट

पंजाब में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं. नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई ज़िले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. अब जालंधर में भी खतरा बढ़ गया है. सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, गिदड़पिंडी- मखू रेलखंड पर बने पुल नंबर 84 पर पानी का स्तर खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है

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बालकनी कविता: एक छोटी जगह, बड़े ख्वाब

बालकनी

बालकनी केवल घर का हिस्सा नहीं, मन का खुला आकाश है। यह वह स्थान है जहाँ विचारों को उड़ान मिलती है, सपनों को पंख लगते हैं और जीवन की छोटी-बड़ी हलचलें दिखाई देती हैं। कभी नन्ही चिड़िया यहाँ समय बिताती है, तो कभी गिलहरी अपने करतब दिखाती है। महिलाएँ सजती हैं, युवा मोबाइल में खो जाते हैं, बुज़ुर्ग यादों के किस्से सुनाते हैं और बच्चे दुनिया को समझते हैं। यही जगह आँसू छुपाने, उदासी मिटाने और क्रोध शांत करने का भी सहारा बनती है। अंत में एक कप कॉफी संग मुस्कुराहट लौट आती है।

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रिश्ते कुछ जाने कुछ अनजाने से

रिश्ते कुछ जाने-पहचाने होते हैं और कुछ अनजाने। कुछ जन्म से मिलते हैं तो कुछ समय और प्रयास से बनते हैं। ये कलियों की तरह कोमल और फूलों की तरह नाज़ुक होते हैं, लेकिन धैर्य और निभाने से लंबे समय तक टिके रहते हैं। समझ की डोर से बंधे ये रिश्ते जीवन के तूफ़ानों में भी नहीं टूटते। सुख-दुख में ये हमेशा साथ चलते हैं और एक-दूसरे को सहारा देते हैं। सच्चे रिश्ते प्रेम, समर्पण और ईमानदारी से पनपते हैं, और हर चुनौती का सामना मिलकर करते हैं। कठिनाइयों में ये हौसला बढ़ाते हैं और संघर्षों को जीत में बदल देते हैं। मन की उथल-पुथल में भी ये शांति देते हैं और आंधियों में भी अडिग खड़े रहते हैं। निराशा के क्षण आते हैं, फिर भी सच्चे रिश्ते कभी टूटते नहीं, क्योंकि इन्हें जोड़ती है भरोसे, करुणा और आपसी देखभाल की ताक़त।

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खिड़की के पास बैठा एक व्यक्ति, डूबती शाम की रोशनी में जिंदगी की किताब के साथ भावनात्मक चिंतन करता हुआ दृश्य

राज़-ए-ज़िंदगी

यह ग़ज़ल ज़िंदगी के रहस्यों, प्रेम और अस्तित्व के गहरे एहसासों को बयां करती है। कवि ने “किताब-ए-ज़िंदगी” के रूपक के माध्यम से जीवन के अनसुलझे प्रश्नों और भावनाओं को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। हर शेर जीवन के एक नए पहलू को उजागर करता है।

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