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विश्वभर में मनाया गया इंटरनेशनल मीटलेस डे

साधु वासवानी की 146वीं जयंती पर करुणा और शाकाहारी संदेश का उत्सव पुणे से सुरेश परिहार की रिपोर्ट करुणा, शांति और शाकाहारी जीवनशैली के संदेश को समर्पित इंटरनेशनल मीटलेस डे इस वर्ष भी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर मनाया गया। गुरुदेव साधु टी. एल. वासवानी की 146वीं जयंती के अवसर पर दुनियाभर में आध्यात्मिक…

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अहाना को धर्मेंद्र की दौलत नहीं, ये विरासत चाहिए

मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की बेटी अहाना देओल ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पिता की संपत्ति या दौलत में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता की पहली कार, उनकी फिएट, को विरासत में चाहती हैं। उनका कहना था कि इस कार से जुड़े अनगिनत…

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उज्जैन रेलवे स्टेशन का डिजाइन फिर बदला

उज्जैन रेलवे स्टेशन की डिजाइन बदलने के कारण काम एक बार फिर लेट हो गया है। बताया जा रहा है कि अब स्टेशन का नई डिजाइन में निर्माण सिंहस्थ के बाद ही हो सकेगा।15 महीने पहले उज्जैन समेत इंदौर, नागदा, खाचरौद, आलोट और रतलाम मंडल के 11 रेलवे स्टेशनों का पीएम मोदी ने भूमि पूजन किया था। इनमें से उज्जैन को छोडक़र बाकी सभी स्टेशनों पर कार्य शुरू हो चुका है। नागदा स्टेशन का कार्य अंतिम चरण में है।

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उज्जैन की बेटी ने पोलैंड में बढ़ाया भारत का मान

मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के लिए गर्व का पल। नगर की ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर आयशा सना कुरैशी ने पोलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में ‘मिस इंडिया पोलैंड 2025’ का ताज जीतकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत और प्रदेश का नाम रोशन किया।

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दूरी के साये

आजकल विदेश में बसे बच्चों के माता-पिता का अंतिम जीवन कुछ ऐसा ही होता है. कई माता-पिता का पार्थिव शरीर फ्रीज़र में दिनों तक रखा रहता है, बच्चों के आने का इंतज़ार करता हुआ। कई बुज़ुर्ग अपने फ्लैट में अकेले मर जाते हैं. 3–4 दिन बाद बदबू आने पर पड़ोसियों को पता चलता है, फिर बच्चों को खबर दी जाती है।

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बेचारी बिल्ली

आंगन में लगे अमरूद के पेड़ को देखकर बहूरानी का मन हर रोज़ ललचा जाता था, लेकिन आंगन की खाट पर बैठी माँजी की वजह से चुपके से तोड़ पाना मुश्किल था। एक दिन माँजी गहरी नींद में थीं, तो बहू ने जल्दी से कुछ अमरूद तोड़कर खिड़की वाली मेज़ पर छुपा दिए। लेकिन इस पूरी चोरी को एक सयानी बिल्ली देख रही थी। बाद में वही बिल्ली मेज़ पर चढ़कर सारे अमरूद उठा ले गई। जैसे ही सास-बहू ने देखा, बहू तो घबरा गई, और सास ने गुस्से में “चालाक बिल्ली” को चप्पल-डंडे से खूब भगाया।

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संविधान: अधिकारों की आज़ादी या प्रतिबंधों की जकड़न?

26 नवम्बर का दिन हमारे लोकतंत्र के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन 1949 में भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था। किताबों में हमने पढ़ा कि यह संविधान हमें मौलिक अधिकार देता है. बोलने की स्वतंत्रता, जीने का अधिकार, धर्म मानने की आज़ादी, समानता का अधिकार और भी बहुत कुछ। लेकिन जैसे-जैसे जीवन को समझा और समाज को करीब से जाना, महसूस हुआ कि किताबों और असल ज़िंदगी के बीच एक खाई है।

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शब्दकोष बना… पर मान्यता नहीं मिली!

निमाड़ी भाषा को लोकभाषा का दर्जा दिये जाने के लिये दशकों से संघर्ष कर रहे जगदीश जोशीला (खरगोन) को इस बात का दुख है कि सरकार निमाड़ी की अनदेखी करती आ रही है। अब तक 56 से अधिक किताबों में 28 निमाड़ी भाषा में लिख चुके साहित्यकार जोशीला को भले ही इस भाषा का शब्दकोष बनाने पर पद्मश्री से सरकार ने सम्मानित किया हो किंतु उनके मन में टीस है कि मालवी सहित अन्य चार भाषाओं को तो लोकभाषा मान लिया गया लेकिन निमाड़ी आज भी बोली ही मानी जा रही है।

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हाड़ी पर खड़ा एक युवा सूर्योदय की ओर देखते हुए, सपनों और उम्मीदों का प्रतीक

सपनों की उड़ान

सपने केवल कल्पनाएँ नहीं होते, वे हमारे जीवन की सबसे सच्ची और जीवंत ऊर्जा होते हैं। वही हमें भीतर से प्रेरित करते हैं, हमें आगे बढ़ने का कारण देते हैं और हर ठहराव के बीच गति का संचार करते हैं। जब हम अपने सपनों को महसूस करते हैं, उन्हें जीते हैं और अपनी भावनाओं से पोषित करते हैं, तब वे मात्र विचार नहीं रहते वे हमारी पहचान का हिस्सा बन जाते हैं।

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