यह घर बहुत हसीन है
मेरी ज़िंदगी एक जगह से शुरू नहीं हुई।
वह एक किराए के मकान से दूसरे तक भटकती रही। यह घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बना, इसमें हमारे डर, संघर्ष और सपने बसे हैं। इसीलिए यह साधारण-सा घर मेरे लिए बहुत हसीन है।

मेरी ज़िंदगी एक जगह से शुरू नहीं हुई।
वह एक किराए के मकान से दूसरे तक भटकती रही। यह घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बना, इसमें हमारे डर, संघर्ष और सपने बसे हैं। इसीलिए यह साधारण-सा घर मेरे लिए बहुत हसीन है।
मध्य रेल के मुंबई मंडल पर रविवार 21 दिसंबर 2025 को इंजीनियरिंग और रखरखाव कार्यों के चलते मेगा ब्लॉक रहेगा. ठाणे–कल्याण मेन लाइन, हार्बर और ट्रांस हार्बर लाइनों पर लोकल, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की सेवाएं प्रभावित होंगी. यात्रियों से वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने और सहयोग करने की अपील की गई है.
साहित्यिक पत्रिका विरासत की प्रथम वार्षिकी और नवीन अंक के विमोचन के अवसर पर मुंबई में एक भव्य साहित्यिक और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कविता, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ प्रमुख साहित्यकारों और विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता रहेगी.
अहान पांडे और अनीत पड्डा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री किसी रणनीति का नतीजा नहीं, बल्कि सच्ची दोस्ती से उपजी एक स्वाभाविक जादू है, जिसने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली है.
BMW Motorrad India ने 1 जनवरी 2026 से अपने पूरे उत्पाद रेंज की कीमतों में अधिकतम 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की घोषणा की है. BMW Group India के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बराड़ ने कहा कि भारतीय रुपये के अमेरिकी डॉलर और यूरो के मुकाबले तेज़ मूल्यह्रास के कारण विदेशी मुद्रा का दबाव पिछले कई महीनों से बना हुआ है. इसके साथ ही कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत भी प्रभावित हुई है. प्रस्तावित मूल्य वृद्धि से कंपनी और डीलर भागीदारों के लिए आवश्यक लाभप्रदता सुनिश्चित करने और निरंतर मूल्य सृजन में मदद मिलेगी.
स सिर्फ़ आवाज़ नहीं होता, वह एक जुनून होता है। टेपरिकार्डर, कैसेट और जुगाड़ से पैदा हुआ वह गूंजता बेस, जो साधारण मशीन को भी महफिल बना देता था। मटके पर उल्टा रखा स्पीकर सिर्फ़ प्रयोग नहीं था, वह उस दौर की रचनात्मक ज़िद थी जहाँ साधन कम थे, पर शौक़ और शरारत दोनों भरपूर थे। और हाँ, घर से थोड़ी दूर रहने वाली ‘बेबी’ को भी वही बेस पसंद था।
पाँचवीं से छठवीं में कदम रखते ही स्कूल मेरे लिए पढ़ाई से ज़्यादा एक अजीब अनुभव बन गया था। कक्षा में न विद्यार्थी थे, न प्रतिस्पर्धा सिर्फ़ मैं और मेरा वर्चस्व। पिता का अनुशासन, स्कूल में उनका रुतबा और मेरी अकेली उपस्थिति ने मुझे अनजाने ही “दादीगीरी” का ताज पहना दिया। यह दादीगीरी डर से नहीं, परिस्थितियों से उपजी थी. जहाँ सीखने के साथ-साथ प्रभुत्व भी अभ्यास का हिस्सा बन गया।
समाज ने औरत के अस्तित्व को एक ऐसे समीकरण में बैठाया है जो कभी भी अपना फॉर्मूला बदल सकता है मनचाहा उत्तर पाने के लिए । व्यंग है दोहरे मापदंड वाले समाज पर जो औरत को हर पल एक स्केनर के नीचे रखता है ।
आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं होतीं, वे भीतर छुपे भावों की सबसे सशक्त भाषा होती हैं। जब शब्द असहाय हो जाते हैं, तब नयन ही संवाद का कार्य संभालते हैं। कभी शिकायत, कभी शरारत, कभी विद्रोह आँखों की हर गति मन के भीतर चल रहे परिवर्तन को प्रकट कर देती है। वे मनोभावों की कुशल गुप्तचर हैं, जो बिना कुछ कहे भी सब कुछ कह जाती हैं।