मकाँ

एक जर्जर मकाँ खंडहर की तरह ढहता दिखाई देता है। कभी उसी छत के नीचे बच्चों की चहचहाहट गूँजती थी, माँ और बाबा की बातें घर को जीवंत बना देती थीं। आज वातावरण उदासी और रंजो-ग़म से भरा है, मानो साँसें भी उखड़-सी गई हों। दिल बार-बार उसी पुराने आशियाने को ढूँढता है, जहाँ अपनापन और जीवन की गर्माहट हुआ करती थी।

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अपनी राह पर अकेले खड़ा व्यक्ति, जो समाज की परवाह किए बिना आगे बढ़ रहा है

बढ़े जा रहे हो किस ओर

जीवन की राहें कठिन ज़रूर लगती हैं, पर हर कदम उम्मीद पर ही आगे बढ़ता है। सपनों और अपनों की दिशा में अब तक उठे कदम हमेशा सही राह पर ले गए हैं, इसलिए विश्वास है कि आगे भी यही होगा। राहें मुश्किल हों तो क्या, अगर डटे रहें तो पार की जा सकती हैं। मंज़िल हर किसी को पानी है, मगर अक्सर लोग लंबी दूरी से घबरा जाते हैं। अंततः वही लोग मंज़िल तक पहुँचते हैं, जिनके हौसलों में बड़ी उड़ान होती है।

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जन्‍म नहीं दोगी मुझको?

एक अजन्मी बच्ची अपनी माँ से प्रश्न करती है—“माँ, मैं भी तो तुम्हारा ही अंश हूँ, फिर क्यों मुझे जन्म नहीं दोगी? मेरा कसूर क्या है?” वह कहती है कि उसने अब तक न तो सूरज की रोशनी देखी है, न फूलों का खिलना, न चिड़ियों की चहक सुनी है। धरती पर कदम रखने से पहले ही उसे बोझ मान लिया गया है।

वह माँ से निवेदन करती है कि उसे एक बार दुनिया में आने का अवसर मिले। वह भरोसा दिलाती है कि कभी माँ पर बोझ नहीं बनेगी, बल्कि नाम रोशन करेगी। वह सानिया मिर्ज़ा, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, साइना नेहवाल और प्रतिभा पाटिल जैसी महान महिलाओं का उदाहरण देती है और कहती है कि वह भी वैसा ही बनकर दिखा सकती है।

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जरा जरा तू हमसे मिल कविता

जरा-ज़रा तू हमसे मिल

जरा जरा तू हमसे मिल, तनिक तनिक उतर मेरे दिल…” यह कविता प्रेम के उन कोमल एहसासों को छूती है, जहाँ शब्द कम और नजरों की भाषा ज़्यादा बोलती है। मिलन की चाह, दिल की तड़प और अनकहे जज़्बातों को बेहद खूबसूरती से पिरोती यह रचना पाठक के मन में एक मधुर रोमांटिक लहर जगा देती है।

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चूड़ियाँ

चूड़ियाँ सिर्फ़ काँच की बनी वस्तुएँ नहीं होतीं। वे माँ के हाथ उठते ही दुआओं का आशीर्वाद बन जाती हैं, बहन के राखी बाँधते ही रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बन जाती हैं, और प्रियतम के सानिध्य में खुशियों की खनक। देखने में नाज़ुक और रंग-बिरंगी होने के बावजूद, वे जीवन की डोर को बाँधने और संबंधों को सहेजने का अद्भुत सामर्थ्य रखती हैं। चूड़ियाँ कमज़ोर नहीं होतीं—वे औरत की शक्ति, उसकी संवेदनाओं और उसके अटूट वसूलों का प्रतीक हैं।

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बलात्कार के केस की धमकी तीन युवकों से वसूली भारी रकम

,सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ाकर एक युवती ने युवक को अपने घर बुलाया और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. इसके बाद बलात्कार का झूठा केस दर्ज करने की धमकी देकर उससे पौने दो लाख रुपये वसूले. जब उसने ५ लाख रुपये की मांग पूरी नहीं की तो उसके खिलाफ बलात्कार और एट्रोसिटी का गंभीर मामला दर्ज कर दिया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि इसी तरह इस युवती ने नांदेड़ और कंधार के दो अन्य युवकों के खिलाफ भी बलात्कार और अट्रोसिटी का मामला दर्ज करवाया है.

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बीड़-अमलनेर नई रेल लाइन का लोकार्पण

 महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री तथा बीड़ के पालकमंत्री  अजित पवार ने आज बीड़ जिले को बड़ी सौगात देते हुए अमलनेर (बी) – बीड़ नई रेल लाइन का लोकार्पण किया तथा बीड़ से अहिल्यानगर के लिए उद्घाटन विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर  पर्यावरण एवं जलवायु परवर्तन तथा पशुसंवर्धन मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे, राज्यसभा सांसद   राजनी पाटिल  लोकसभा सांसद  बजरंग सोनवणे, केंद्रीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। यह समारोह बीड़ रेलवे स्टेशन पर भव्य रूप से संपन्न हुआ।

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प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ड्रोन से जगमगाया आकाश

‘हैप्पी बर्थडे मोदी जी’ का संदेश देते हुए जब हज़ार ड्रोनरूपी तारे आकाश में जगमगाने लगे, तब पुणेकरों की आंखें मानो तृप्त हो गईं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमृत महोत्सव अर्थात ७५वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री और पुणे के सांसद मुरलीधर मोहोल की संकल्पना से इस भव्य ड्रोन शो का आयोजन एस.पी. महाविद्यालय के मैदान में किया गया था.

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संतोष कुमार झा का कविता संग्रह “स्याही का सिपाही”

हिंदी दिवस के अवसर पर गांधीनगर, गुजरात में आयोजित 5वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा के चौथे काव्य संग्रह “स्याही का सिपाही” का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन भारत सरकार के केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन और भारत सरकार की सचिव (राजभाषा) श्रीमती अंशुलि आर्या द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

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क्षणभंगुर जीवन मेरा…

नीलम राकेश, प्रसिद्ध लेखिका, सीतापुर रोड लखनऊ अपने बरामदे में आराम कुर्सी पर बैठे शेलेन्द्र कुमार सिन्हा अपलक एक छोटे बादल के टुकड़े को आकाश में अकेले अठखेली करते देख रहे थे। उनके अन्तस का एकाकीपन पूरी तीव्रता के साथ उनके ऊपर हावी था। अपना जीवन उन्हें इस निरीह क्लांत बादल के टुकड़े जैसा प्रतीत…

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