सितंबर अहा!
सितंबर आते ही ऋतु-संधि का मधुर प्रकाश धरती पर उतर आता है। बरखा की विदाई और शरद की मुस्कान एक साथ झलकने लगती है। खेतों में धान और मक्का लहलहाते हैं, तो आँगनों में गेंदा और कमल अपनी सुगंध बिखेरते हैं। यह महीना केवल प्रकृति के बदलते रंगों का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सवों का भी साक्षी है। पितृपक्ष की श्रद्धा और गणपति का उल्लास, दोनों एक साथ वातावरण को भक्ति और आनंद से भर देते हैं। नीलम-से गगन में पुखराज-सा सूरज चमकता है और मन के आँगन में एक नया उजास जगाता है। सचमुच, सितंबर नवजीवन का संदेश लेकर आता है।
