
डॉ.सविता मिश्र, बिजनौर
जीवन के कृष्ण पक्ष में
विश्वास करने वाले तुम्हारे मन की दीवारों पर
उकेर कर ही रहूंगी
शुक्ल पक्ष की कुछ जगमगाती लिपियां
अंधेरी गुफाओं की काली दीवारों मे़ं
उजली धूप के लिए
खोलूंगी जरूर एक झरोखा
तुम्हारे पतझरी विचारों की महागाथा सुनकर
कोशिश रहेगी
कि लिख सकूं वसंत पर कुछ कविताएं
मुझे उम्मीद है
कि तुमने अपने भीतर
गढ़ डाले हैं अविश्वास के जो अभेद्य दुर्ग
उनके भीतर लगा सकूं विश्वास की
नन्ही सी सेंध
तुम्हें विश्वास करना ही होगा
कि वसंत में फूल खिलेंगे हर बार
चंद्रमा के हृदय से झरेगी उजली चांदनी
सूरज की आंखों से
बरसेंगें स्वर्णिम स्वप्न
हताशा की चट्टानें दरकेगीं जरूर
एक नन्हीं चिड़िया
सुदूर आकाश में गीत गाती हुई उड़ेगी जरूर
और तुम कहोगे…
सचमुच बहुत सुंदर है दुनिया
लेखिका के बारे में-
सविता मिश्र
हिन्दी साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित और बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जिनका जन्म 17 जून 1962 को आगरा में हुआ। उन्होंने एम.ए., पीएच.डी. तथा डी.लिट् जैसी उच्च शिक्षाएँ प्राप्त कर शैक्षणिक उत्कृष्टता का उदाहरण प्रस्तुत किया।अपने अध्ययन काल में उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।वे रा. भा. दे. स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, बिजनौर के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के रूप में दीर्घकाल तक सेवाएँ देकर सेवानिवृत्त हुईं। उनके मार्गदर्शन में 15 शोधार्थियों ने शोध उपाधि प्राप्त की तथा कई अन्य शोध कार्यरत हैं। कविता, कहानी, संस्मरण, समीक्षा और शोध-लेख जैसी विविध विधाओं में उनका लेखन निरंतर प्रकाशित होता रहा है। उनकी रचनाएँ प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में स्थान पाकर व्यापक सराहना अर्जित कर चुकी हैं। दिल्ली दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे मंचों पर उनकी साहित्यिक उपस्थिति ने उन्हें और अधिक पहचान दिलाई। उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कारों से अलंकृत किया जा चुका है। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है।

कविता के सुंदर प्रस्तुतीकरण के लिए हार्दिक आभारआपका।
Truly beautiful