Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

LIVE WIRE NEWS NETWORK

बच्चों का बदलता व्यवहार

बचपन के वो दिन अब दूर हो गए जब बच्चे मां के आंचल में सुकून ढूंढते और पिता की बातों में जीवन का ज्ञान पाते। गलियों और मैदानों में खेल, दादी-नानी की कहानियाँ और माता-पिता का आदर अब कहीं खो सा गया है। आज बच्चे मोबाइल की स्क्रीन और डिजिटल दुनिया में खोए हुए हैं।पहले जैसा प्यार और सम्मान अब कम नजर आता है, माता-पिता की सीख बोझ लगती है और संस्कार भूलते जा रहे हैं। पढ़ाई का दीपक मंद पड़ता है और सपनों का आंगन सिकुड़ता है।
फिर भी उम्मीद बाकी है। यदि माता-पिता बच्चों को प्यार और समझ से मार्गदर्शन देंगे, तो उनका भविष्य और संस्कार फिर से चमकने लगेंगे।

Read More
महिदपुर रोड के एक मंदिर परिसर में संतोष विश्वकर्मा श्रद्धालुओं के साथ खड़े, पारंपरिक परिधान में, सेवा और समर्पण का प्रतीक दृश्य

सेवा ही सबसे बड़ी साधना

महिदपुर रोड के समाजसेवी संतोष विश्वकर्मा (भूरा सेठ), जिन्हें लोग “टेम्पल मैन” के नाम से जानते हैं, अपनी गहरी धार्मिक आस्था और निस्वार्थ सेवाभाव के लिए पहचाने जाते हैं। मंदिरों के जीर्णोद्धार, नवदुर्गा महोत्सव के आयोजन और कांवड़ यात्राओं में उनका समर्पण समाज के लिए एक प्रेरणा है। उनका जीवन संदेश देता है कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें सेवा और विनम्रता का भाव हो।

Read More

देहरियों के पार..

एक स्त्री (या प्रतीक्षारत आत्मा) आकाश की नीली छाँव और हरियाली की गोद में खड़ी है। वह एक वृक्ष का सहारा लिए सदियों से प्रतीक्षा कर रही है—अपने चितचोर (प्रिय/प्रियतम) की खोज में। उसकी आँखें अपलक रास्ता निहार रही हैं और कान पदचाप की आहट सुनने को आतुर हैं।

समय गुज़रता गया, परंतु उसकी प्रतीक्षा समाप्त नहीं हुई। वह खुद को एक प्यासी नदी की तरह अनुभव करती है, जो कभी अमृत-सरीखी धारा बहाती थी, पर अब सूख चुकी है। फिर भी उसके भीतर यह विश्वास बना हुआ है कि उसका प्रिय अवश्य आएगा। यही एक सपना उसकी आँखों की रोशनी और मन की गर्माहट बनाए रखता है।

Read More

टूटता मानव…

मनुष्य आज अपने ही भीतर टूट रहा है। बिना वजह झगड़े पर आमादा है, जबकि जीने की जद्दोजहद पहले से ही कठिन है। कोई शराब और सिगरेट जैसे नशों में डूबा है, कोई जीवन की खुशियाँ खोकर केवल मरने की प्रतीक्षा कर रहा है।

वह अपने दिल में सिर्फ़ दर्द सँजोए बैठा है और खुद को ही ठुकराता जा रहा है। प्यार के रिश्तों में भी उसे छलावा और धोखा मिलता है, जिससे वह गुनहगार-सा महसूस करता है। समाज में झूठ और धोखे का बोलबाला है, सच्चाई का कोई रखवाला नहीं। ऐसे में आदमी सिर्फ़ होशियार होना सीख गया है, संवेदनाएँ खो बैठा है और संघर्षों में हारकर रोने पर मजबूर है।

Read More

क्या-क्या है हिंदी

कविता हिंदी भाषा की विविधता, सांस्कृतिक महत्व और इसकी भावनात्मक गहराई को उजागर करती है। यह बताती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह संबंधों, संस्कारों, व्यक्तित्व, वीरता, साधना और भक्ति का प्रतीक है। मां की गोद से लेकर ऋषि-मुनियों की सभ्यता, संत-कवियों की शिक्षा और समाज के विविध अनुभव—हिंदी इन सबका माध्यम रही है। कविता में यह भी कहा गया है कि हिंदी ने विश्व मंच पर भी अपनी पहचान बनाई है और विभिन्न परिस्थितियों में लोगों के मनोभावों, संस्कारों और इतिहास को व्यक्त किया है।

Read More

हिंदी और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ: राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

उज्जैन। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला एवं ललित कला अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हिंदी भाषा और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ विषय पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वक्ता नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार…

Read More

“हँसी, प्यार और टॉफी”

कविता बच्चों की मासूमियत और उनके प्रिय व्यंजन—टॉफी किस्मी बार—के इर्द-गिर्द घूमती है। यह उनके खुशियों भरे छोटे-छोटे क्षणों को दर्शाती है, जैसे नन्हे-मुन्ने बच्चों का पापा से टॉफी की उम्मीद करना, जन्मदिन पर खुशी और परिवार के साथ बिताए गए प्यारे पल। कविता में न केवल मिठास बल्कि प्यार, दोस्ती और सरल जीवन की खुशियों का जश्न भी है। हर बार “प्यारी टॉफी किस्मी बार” का दोहराव बच्चों की मासूमियत और आनंद को उजागर करता है।

Read More

नई राहें, नया सफर

कविता एक नए आरंभ और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। यह हमें प्रेरित करती है कि बीते हुए पलों और कठिन अनुभवों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें। सूरज की नई किरण और आशा की नई रोशनी जीवन में नई संभावनाएँ लेकर आती है। हर अनुभव, चाहे खुशी हो या कठिनाई, हमें कुछ सिखाता है। संघर्षों से डरने की बजाय उन्हें अवसर के रूप में देखें। इच्छाशक्ति और हौसले के साथ, हम अपने जीवन की कहानी को नई शुरुआत के साथ लिख सकते हैं।

Read More

मनचाहे रंग…

वह चित्रकार थी, लेकिन कभी अपने चित्त और आत्मा के अनुरूप पूरी तरह नहीं रंग भर पाई। समाज उसे “बेचारी” कहता था। तब वह कृष्ण के सारथी की तरह अपने रथ को चलाती थी। अब वह स्वतंत्र है—बे लगाम घोड़े दौड़ाती है, वरदान मांगती है, और उपकार के बदले कुछ चाहती नहीं। आसमान नीला नहीं, धरती बंजर और पानी सूखा है, फिर भी वह अपने मनचाहे रंग अपनी आत्मा में भरती है, चाहे वह गणितीय नियमों के आधार पर हों। आज वह अब बेचारी नहीं, बल्कि वैचारगी और सशक्तता का प्रतीक है।

Read More

वो ही माँ बनाने को मन करता है

एक नंगी ईंट की दीवार और उसके पास चूल्हा, जिस पर उपले की आँच में रोटियाँ सिकती हैं। माँ के पास चिमटा तो है, फिर भी कभी-कभी ऐसा लगता है कि उसके जीवन से कुछ पल चुराए जाएँ। उसकी तपती ज़िंदगी, खुरदरी हथेलियाँ और जीवन की सारी सिलवटें यह सब गहरी कहानियाँ बयां करती हैं। समय तो गुजर चुका है, लेकिन जो आँसू उसने छुपाए थे, उन्हें समझने और पोछने की इच्छा रहती है। यह एक नज़दीकी और भावनात्मक दृष्टिकोण है, जिसमें माँ के संघर्ष और उसके भीतर छुपी कोमलता दोनों ही सामने आती हैं।

Read More