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रंगों को मलाल है..

होली के रंग और यादों की कहानी

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद

रंगों को मलाल है
हाले दिल बेहाल है।

गुलाब खिल उठे जहां
गुलाल को मलाल है।

रंगरेज बन रंग गया
रंगों की क्या मजाल है।

खामोश रंग यादों के
नाच उठे बेताल है।

अरसा हुआ मगर
आज बहकी चाल है।

साथ हम क्यों नहीं
होली का ये सवाल है।

दूर नजर से तो क्या
साथ हम खयाल है

रंग एक भी नहीं
सजे फिर भी गाल है।

हवा छू के कह गई
प्रेम ही गुलाल है।

रंगों को मलाल है
हाले दिल बेहाल है।

2 thoughts on “रंगों को मलाल है..

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