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प्रभु का प्रसाद

मंदिर में हाथ जोड़कर प्रार्थना करता भक्त, पीछे जलते दीपक और दिव्य प्रकाश जब मन सच्ची श्रद्धा से झुकता है, तब प्रभु का प्रसाद स्वयं मिल जाता है।

डॉ. कृष्णा जोशी, प्रसिद्ध कवयित्री, गुजराती कॉलेज, इंदौर

प्रभु का मिले प्रसाद,
सिर पर आशिर्वाद,
जीवन रहे आबाद,
वर ऐसा दीजिए।
भक्ति करें आठों याम,
बनें जायें सब काम,
भजें सदा प्रभु नाम,
शरण में लीजिए।
खुशी की बहे बयार,
सुखिया रहे संसार,
आपस में पले प्यार,
प्रेम रस पीजिए।
मंगल रहें विचार,
मिटें उर के विकार,
सपने बनें साकार,
‌दया प्रभु कीजिए
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