
गुलशन मदान, प्रसिद्ध लेखक एवं गीतकार, मुंबई
कब से मेरे यार संभाले बैठे हैं
दिल में तेरा प्यार संभाले बैठे हैं
एक ख़बर कल आई तेरे आने की
अब तक वो अखबार संभाले बैठे हैं
रोज़ तुम्हे खत लिखते हैं हम अश्कों से
इश्क का कारोबार संभाले बैठे हैं
दिल आंसू तन्हाई यादें ग़म गुलशन
ज़ख्मों का अंबार संभाले बैठे हैं
