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तलाश

रीता मिश्रा तिवारी, प्रसिद्ध लेखिका

तलाश रास्ते की नहीं, मंज़िल की होती है…
ज़िंदगी से बहुत दूर, ये हम कहाँ आ गए हैं।

ज़िंदगी में ख़ुद की तलाश है,
मिल जाए तो फिर किसी की तलाश नहीं।

सुख सोने देता नहीं और दुःख जागने नहीं देता,
फ़र्क इतना कि ज़िंदगी का कोई रंग नहीं।

तमाम मुसीबतें मुस्कुरा कर झेलते हैं,
फ़र्क इतना कि बेफ़िक्री में ज़िंदगी बिताते हैं।

आदत है हमें दुनिया के पीछे न चलने की,
ज़िंदगी की तलाश में जीवन आगे निकल गया।

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