आधुनिक जीवनशैली पर एक महत्वपूर्ण पड़ताल

रेणु सिद्धू, प्रसिद्ध साइकोलॉजिस्ट एवं लेखिका, जयपुर
आज का समय डिजिटल युग का है. जहाँ स्मार्टफोन हमारी जेब में नहीं, बल्कि लगभग हमारे दिमाग में बस गया है. सूचना, मनोरंजन, शिक्षा, कामसब कुछ अब एक छोटे से स्क्रीन पर उपलब्ध है. लेकिन सुविधा का यह संसार कब खामोशी से आसक्ति में बदल जाता है, कई बार हमें पता भी नहीं चलता.
क्या आप भी अनजाने में फोन एडिक्शन का शिकार हो रहे हैं?
अध्ययन बताते हैं कि सामान्य तौर पर दिन में 2-3 घंटे फोन का उपयोग (काम या पढ़ाई को छोड़कर) संतुलित माना जा सकता है. सोशल मीडिया के लिए 1 घंटे से अधिक समय धीरे-धीरे डोपामिन ओवरलोड और एडिक्शन की तरफ ले जाता है.
यह जानना बेहद जरूरी है कि क्या आप भी उसी दलदल में फँस रहे हैं.

एडिक्शन के प्रमुख संकेत
एक रील से शुरू होकर घंटों स्क्रॉल करना
आप सिर्फ 10 मिनट के लिए सोशल मीडिया खोलते हैं, लेकिन देखते-देखते एक घंटा निकल चुका होता है और एहसास भी नहीं होता.
रात में नींद खुलते ही फोन चेक करना
फोन उठाए बिना नींद पूरी नहीं होती. गहरी नींद लगातार टूट रही है, सुबह थकान महसूस होती है.
दिमाग में नोटिफिकेशन की गूँज
भले ही फोन साइलेंट पर हो, लेकिन मन में लगातार नोटिफिकेशन आने का भ्रम रहता हैइसे फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम कहते हैं

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फोन पास न हो तो बेचैनी
चार्जिंग पर लगाया और हर दो मिनट में देखने लगना कितना चार्ज हुआ? यह भी एडिक्शन का संकेत है.
बिना वजह फोन चेक करना
कोई काम नहीं, कोई जरूरत नहीं. फिर भी बार-बार स्क्रीन खोलना.
ऑनलाइन गेम्स में बढ़ती डूब
हर खाली समय गेम्स में निकल जाना, समय भूल जाना, गुस्सा या तनाव महसूस करना. यदि इनमें से तीन या अधिक लक्षण आप पर लागू होते हैं, तो आपको अपने डिजिटल व्यवहार को नियंत्रित करने की जरूरत है.
एडिक्शन से बचने के प्रभावी उपाय
सोने से कम से कम 1 घंटे पहले फोन बंद करें
फोन की नीली रोशनी मेलाटोनिन (नींद का हार्मोन) को बाधित करती है. यह नींद की गुणवत्ता को खराब करती है और मन को बेचैन रखती है.
फोन को एक बार में 30 मिनट से ज्यादा न चलाएँ
स्क्रीन टाइम को छोटे-छोटे अंतरालों में विभाजित करें.
सोशल मीडिया के लिए समय सीमा तय करें
एक घंटा देखना जरूरी हो तो, 10-10 मिनट के स्लॉट बनाएँ.
इससे दिमाग कम समय में हाई डोपामिन जंप्स से बचा रहता है.
सुबह उठते ही फोन न उठाएँ
दिन की शुरुआत फोन से होगी, तो दिमाग तुरंत तनाव और तुलनाओं में घिर जाएगा.सुबह का समय मन और ऊर्जा को रीसेट करने के लिए रखें.ऑनलाइन से ज्यादा ऑफलाइन जीवन जिएँ. दोस्तों से मिलें, खेलें, परिवार के साथ समय बिताएँ. याद रखें जिंदगी स्क्रीन पर नहीं, आपके आसपास चल रही है. फोन और सोशल मीडिया हमारे जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें हमारे जीवन का मालिक नहीं बनना चाहिए. संतुलन बनाना ही स्मार्ट लाइफ का असली मंत्र है. अगर आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो आज ही पहला कदम उठाएँ, क्योंकि आपका समय, आपका मन और आपकी सेहत स्क्रीन से कहीं ज्यादा कीमती है.
