
‘अर्चना अश्क मिश्रा ,प्रसिद्ध लेखिका,
मेरा श्रृंगार
मेरा अभिमान,
मेरा स्वाभिमान
तू ही तो मेरा
श्रृंगार प्रिये।
मेंहदी रचे,
चूड़ी खनके,
रुनझुन बाजे
पायल प्रिये।
हर सुख–दुख के
साथी तुम,
जितनी भी धूप
तुम ही तो छाँव प्रिये।
सकल मनोरथ तुमसे ही,
न छूटे हाथ, न ही साथ।
मोह–माया तज बस तेरी हुई
तू ही तो मेरा श्रृंगार प्रिये।