रोशनी के दोहे

मनवीन कौर पाहवा, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई

भरें उजाला नेह का, चमके सब संसार।
दीपों के इस पर्व में, खुशियाँ मिलें अपार।

सजे-धजे बाज़ार हैं, भीड़-भरे भंडार।
फूल, बतासे बिक रहे, आया है त्योहार।

सुंदर साड़ी पहनकर, राधिका हुई मगन।
पायल की छनन-छन से, हर्षित हुआ है मन।

घट-घट बसती ज्योति है, सब के मन में राम।
प्रीति उजाला कर रहे, सुबह-शाम अविराम।

अहम-वाहम को छोड़कर, जप लें प्रभु का नाम।
सदकर्मों से मिल जाएँ, सारे चारों धाम।

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