जन्‍म नहीं दोगी मुझको?

डॉ. शशिकला पटेल असिस्‍टेंट प्रोफेसर (मुलुंड पूर्व ) मुंबई

माँ, मैं भी हूँ एक अंश तुम्हारा,
क्यों जन्‍म नहीं दोगी मुझको?
बोलो, मेरा है कसूर क्या?
क्यों मार यूँ ही दोगी मुझको?

मैंने तो अब तक न देखी रोशनी,
न देखा फूलों का खिलना।
न चिड़ियों की चहक सुनी,
न देखा सूरज का उगना।
अब तक धरती पर कदम न रखा,
बोझ हो गई तो भी मैं।
बोलो, मेरा है कसूर क्या?
क्यों मार यूँ ही दोगी मुझको?

कैसे सोच लिया माँ तुमने,
तुमको पीड़ा पहुँचाऊँगी।
तुम पर बोझ बनूँगी,
काम न कोई कर पाऊँगी।
कैसे सोच लिया माँ तुमने,
कुछ भी न मैं बन पाऊँगी।
बोलो, मेरा है कसूर क्या?
क्यों मार यूँ ही दोगी मुझको?

एक बार तो आने दो धरती पर,
नाम तुम्हारा कर जाऊँगी।
सानिया मिर्ज़ा, इंदिरा गांधी,
कल्पना चावला, साइना नेहवाल।
प्रतिभा पाटिल बन दिखलाऊँगी,
कैसे सोच लिया माँ तुमने,
कुछ भी न मैं बन पाऊँगी।
बोलो, मेरा है कसूर क्या?
क्यों मार यूँ ही दोगी मुझको?

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