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जन्‍म नहीं दोगी मुझको?

एक अजन्मी बच्ची अपनी माँ से प्रश्न करती है—“माँ, मैं भी तो तुम्हारा ही अंश हूँ, फिर क्यों मुझे जन्म नहीं दोगी? मेरा कसूर क्या है?” वह कहती है कि उसने अब तक न तो सूरज की रोशनी देखी है, न फूलों का खिलना, न चिड़ियों की चहक सुनी है। धरती पर कदम रखने से पहले ही उसे बोझ मान लिया गया है।

वह माँ से निवेदन करती है कि उसे एक बार दुनिया में आने का अवसर मिले। वह भरोसा दिलाती है कि कभी माँ पर बोझ नहीं बनेगी, बल्कि नाम रोशन करेगी। वह सानिया मिर्ज़ा, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, साइना नेहवाल और प्रतिभा पाटिल जैसी महान महिलाओं का उदाहरण देती है और कहती है कि वह भी वैसा ही बनकर दिखा सकती है।

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नारी शक्ति

नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्राचीन काल से ही सीता, गार्गी, सावित्री और अपाला जैसी नारियों ने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से समाज को नई दिशा दी। मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर और बेगम हजरत महल जैसी वीरांगनाओं ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि नारी किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं।
आधुनिक युग में भी नारी ने हर क्षेत्र—विज्ञान, राजनीति, कला, खेल और व्यापार—में सफलता के झंडे गाड़े हैं। कल्पना चावला, किरण बेदी, सुनीता विलियम्स और मैरी कॉम जैसी प्रेरणादायी महिलाएँ इसका प्रमाण हैं।

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