जरा-ज़रा तू हमसे मिल

जरा जरा तू हमसे मिल
तनिक तनिक उतर मेरे दिल
नैना तेरे जो कहते
मुख से कह उसको ना सिल।

जरा जरा तू हमसे मिल
तनिक तनिक उतर मेरे दिल।

अंतस की बुझुँ सब बातें
सपनो में जागी संग रातें
अहसासों को कभी प्रियवर
आकर कानों में कह जाते।
सुनकर बातों को सारी
चेहरे फिर तो जाते खिल
जरा जरा तू हमसे मिल।
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भरकर प्रिये तू पार्श्व में
हर ले वेदना हिय की
पाट दे अधरों को सखे
अमृत वर्षा कर अमिय की।
तुमसे जो ना मिल पाऊँ
तड़पे दिल फिर तो तिल तिल
जरा जरा तू हमसे मिल।

सुन ले अब इस निलय में
आ बसी बिना दस्तक के
देर न अब किंचित करना
बंध जाएँ बस परिणय में।
डूब गईं इन आँखों में
नयन जैसे तेरी झील।

जरा जरा तू हमसे मिल
तनिक तनिक उतर मेरे दिल
नैना तेरे जो कहते
मुख से कह उसको ना सिल।

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