खरगोश-सा नाज़ुक दिल

कल्पना मनोरमा, प्रसिद्ध साहित्यकार, नई दिल्ली

खरगोश-सा नाज़ुक दिल
वह भीगना चाहती थी हँसी और प्रेम में,
पर उसकी भावनाओं को कभी नहीं समझा गया महत्वपूर्ण।
वह मुस्कराना चाहती थी ओस से भीगी घास को छूकर,
पर कोई थपकता रहा उसे
धोबी के पत्थर पर गीले कपड़ों की तरह।

स्थूल प्रेम की थपक से
वह बदलती गई भद्दे, रेतीले दर्रों में,
जहाँ से रिसता रहा लहू,
वह होती रही घायल।

फिर एक दिन—
डोली पछुआ हवा,
घिर आए काले बादल,
चारों ओर झूम-झूमकर हुई बरसात।
वह भीगती रही अबोध बालक की तरह,
देर तक अपने भीतर-बाहर
महसूसती रही बादलों के हाथ अपने ललाट पर।

हवा की अंतहीन यात्रा
ठहर गई आकर
उसके पथरीले उरोजों पर,
जिनके नीचे मचल रहा था
उसका खरगोश-सा नाज़ुक दिल।

बेस्वादी जीवन के गिलास में
भरने लगा रंगहीन प्रेमिल शरबत।
बूँदों से लदी पलकें उठाकर
उसने पहली बार देखा—
क्षितिज पर तना
सतरंगी इंद्रधनुष।

भावनाओं के सुरमई आकाश पर
छोड़ दी उसने अरमानों की पतंग,
और घेर लिया खुद को
गोलाकार अपनी ही बाहों में।

अंजाना मन खोया रहा
अपने होने में,
वह भीगती रही फुहारों में
और उस दिन बदल गई अचानक
कठोरता तरलता में।

धरती कब आकाश बनी,
नहीं जान सकी स्त्री,
पर अबूझ कलम ने लिख दी
नई इबारत प्रेम की।

घनघोर बारिश के बीच
निर्मित हुआ स्त्री का प्रेमपथ
स्वयं से स्वयं तक के लिए,
और वह निकल गई
अपने ही रास्ते पर हमेशा के लिए।

8 thoughts on “खरगोश-सा नाज़ुक दिल

  1. काश ऐसा होता ! मनोरमा जी दिल के तारों को झंकृत करने वाली रचना।

  2. स्त्री मन का सुंदर प्रकटीकरण। अंतर्तम को छू लेने वाली।बहुत खूब कल्पना मनोरमा जी

    1. आदरणीय साथियों मुझे इस बात की खुशी है कि आप सभी लोग एक-दूसरे की रचनाओं को पढ़ते हैं और अपनी राय व्यक्त करते हैं. इसी तरह से वरिष्ठ साथी, नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहें और समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहें. आप अपनी रचनाएं नियमित रूप से भेज कर सहयोग करते रहें.
      सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज

    1. बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति है इस कविता में। कवयित्री व लेखिका कल्पना मनोरमा जी बधाई की पात्र हैं।

      1. आदरणीय साथियों मुझे इस बात की खुशी है कि आप सभी लोग एक-दूसरे की रचनाओं को पढ़ते हैं और अपनी राय व्यक्त करते हैं. इसी तरह से वरिष्ठ साथी, नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहें और समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहें. आप अपनी रचनाएं नियमित रूप से भेज कर सहयोग करते रहें.
        सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज

    2. आदरणीय साथियों मुझे इस बात की खुशी है कि आप सभी लोग एक-दूसरे की रचनाओं को पढ़ते हैं और अपनी राय व्यक्त करते हैं. इसी तरह से वरिष्ठ साथी, नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहें और समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहें. आप अपनी रचनाएं नियमित रूप से भेज कर सहयोग करते रहें.
      सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज

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