दिल की भाषा

नुपुर परसरामपुरिया, प्रसिद्ध लेखिका,मुंबई

हिन्दी! हिंद! हिन्दू!
ना दूजा नीचे,
ना मैं ऊपर,
सम्मान बराबरी का,
मार्ग हर जीवित व्यक्ति का!

मैं एक भाषा का प्रतीक हूँ,
संचार का जरिया हूँ,
खोई हुई संस्कृति का चिह्न हूँ!
मैं सिर्फ दिल और दिमाग का मिलन नहीं,
आपसी तालमेल का आचरण भी हूँ!

मैं राष्ट्रीय भाषा नहीं हूँ,
पर दिल से निकलने वाली आवाज़ हूँ,
मौखिक–लिखित का रास्ता हूँ,
हम, तुम, आप की लकीर हूँ!

नए ज़माने के साथ भूल ना जाना मुझे,
मुझसे बेहतर दूसरा होगा जरूर,
मुझसे आकर्षित भी मिल जायेंगे बहुत खूब,
धरोहर समझ कर ही,
संभाल के रख लेना मुझे।

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