पति-पत्नी का रिश्ता सबसे पवित्र और सबसे गहरा माना जाता है। सात फेरों में बंधते समय वचन दिए जाते हैं—सुख-दुःख में साथ निभाने के, एक-दूसरे की रक्षा करने के और जीवनभर साथ रहने के।
कहाँ चला जा रहा है समाज? क्यों चला जा रहा है? क्यों बहक रहा है, क्यों बहका रहा है? प्यार से नफ़रत में बदलता चला जा रहा है?
आज का समाज एक अजीब विडंबना से गुजर रहा है। आजकल हम समाचार पत्रों में पढ़ रहे हैं और अपनी आँखों से सोशल मीडिया के माध्यम से देख भी रहे हैं कि कभी कहीं पति अपनी पत्नी को जला देता है, तो कहीं पत्नियाँ अपने पति की हत्या कर देती हैं। कहीं नीले ड्रम में बंद लाश मिलती है, तो कहीं ज़हर देकर मौत के हवाले कर दिया जाता है। सवाल यह है कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है? क्या यह वही पवित्र रिश्ता है जिसे हम सात फेरों और वचनों से जोड़ते हैं?
रिश्तों की पवित्रता कहाँ खो गई?
भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी का रिश्ता सबसे पवित्र और मज़बूत माना गया है। यहाँ शादी सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो आत्माओं के मिलन की भी होती है। सात जन्मों का साथ निभाने की कसमें खाई जाती हैं। लेकिन आज वही रिश्ता, जो विश्वास और प्रेम का प्रतीक होना चाहिए था, संदेह, स्वार्थ और हिंसा का केंद्र बनता जा रहा है। कहीं पत्नी पति को मार रही है या मरवा रही है, और कहीं पति अपनी पत्नी को ज़िंदा आग के हवाले कर रहा है। ऐसा लग रहा है मानो हम किसी ऐसी दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ ये सब करना हमारी दिनचर्या में शामिल हो, और जहाँ रिश्तों की अहमियत खत्म हो चुकी हो।
पति का अत्याचार
अक्सर अखबारों की सुर्खियों में पढ़ने को मिलता है: “पति ने पत्नी को ज़िंदा जला दिया”, “दहेज के लिए पत्नी की हत्या”, “पति ने बेरहमी से अपनी पत्नी को पीटा”।
“पति ने पत्नी की इतनी पिटाई की कि उसकी मौत हो गई।” यह सोचकर ही रूह कांप जाती है कि जिसे अपना जीवनसाथी कहा जाता है, वही जीवन छीन लेता है। यह सिर्फ कानून की नाकामी नहीं, बल्कि इंसानियत की हार भी है।
ये कोई नई बात नहीं है—पति द्वारा पत्नियों पर अत्याचार पहले भी होता था, परंतु पहले किसी को पता नहीं चल पाता था। आजकल सोशल मीडिया के होने से इस प्रकार की घटनाएँ सामने आ रही हैं।
पत्नी का अपराध
दूसरी ओर, हाल के वर्षों में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं:
- “पत्नी ने पति की हत्या कर लाश को नीले ड्रम में छिपा दिया”
- “कहीं प्रेम-प्रसंग के चलते ज़हर दे दिया”
- “कहीं साजिश रचकर पति को मौत के घाट उतार दिया”
यह तस्वीर भी उतनी ही डरावनी है जितनी कि पति द्वारा पत्नी पर अत्याचार करना और उसे ज़िंदा आग के हवाले कर देना। आजकल पत्नियों या महिलाओं द्वारा पुरुषों पर की जाने वाली वारदातें यह बताती हैं कि अब हिंसा और अपराध सिर्फ एक तरफ़ा नहीं रहे, बल्कि दोनों तरफ से रिश्ते ज़हरीले हो रहे हैं।
अब जहाँ पुरुष बदनाम थे इस प्रकार के कुकृत्यों के लिए, वहीं महिलाएँ भी पीछे नहीं रही; अन्य क्षेत्रों की तरह इस क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही हैं।
समाचारपत्रों व समाचार के माध्यम से ताज़ा घटनाएँ:
- ग्रेटर नोएडा: 28 वर्षीय निक्की भाटी को उसके पति और ससुरालवालों ने दहेज और संपत्ति के लिए ज़िंदा जला दिया। इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहने और पार्लर का सपना देखने वाली निक्की की जिंदगी सिर्फ 36 लाख की मांग में निगल ली गई। घटना अगस्त 2025 में घटित हुई। निक्की को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई।
- नागरकुर्नूल (तेलंगाना): पत्नी की हत्या कर जलाया गया। पति श्रीसैलम, एक वेल्डर, शक के चलते स्रावणी की हत्या कर पेट्रोल डालकर जलाया। घटना अगस्त 2025 में हुई; पहले घरेलू हिंसा की शिकायत हुई थी, फिर पुनः हत्या की घटना सामने आई।
- अमृतसर: पत्नी और प्रेयसी ने मिलकर पति को मारा। राजनी शर्मा और उसका प्रेमी सोनू कुमार शर्मा ने मिलकर पति मणि शर्मा की हत्या की और शरीर को नहर में फेंक दिया। मणि की लापता होने की रिपोर्ट के बाद मामला उजागर हुआ, और दोनों को गिरफ्तार किया गया।
- राजस्थान: नीले ड्रम में मिला पति का शव। लक्ष्मी देवी और उसका प्रेमी जितेंद्र शर्मा ने पति हंसराम की गला काटकर हत्या कर दी और शव को नीले प्लास्टिक ड्रम में रखकर छिपा दिया। यह घटना अगस्त 2025 में अलवर जिले (किशनगढ़ बास) की है।
- तेलंगाना: प्रेमी के साथ मिलकर पत्नी ने पति को मार डाला। नई-नवेली पत्नी और उसका बॉस प्रेम संबंध और साजिश के चलते जगुलम्बा गडवल में पति की हत्या कर दी गई, और इसमें आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। (जून 2025)
- मेघालय: हनीमून पर पति की हत्या। सोनम और राजा रघुवंशी, मध्यप्रदेश के युवक-दंपति। मेघालय के चेरापूंजी में हनीमून के दौरान पति राजा का शव गायब हो गया। बाद में झरने के पास गहरी खाई में मिला। पत्नी सोनम पर हत्या की योजना बनाने की रिपोर्ट है, और उसे गिरफ्तार किया गया। (मई 2025)
ये घटनाएँ केवल खबरें नहीं, बल्कि समाज के आईने हैं। हर घर को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर वह रिश्ता, जो सबसे सुरक्षित होना चाहिए था, अब सबसे खतरनाक क्यों बनता जा रहा है?
आख़िर क्यों हो रहा है ऐसा?
इन घटनाओं पर गौर करने और परिवार से बातचीत करने पर कुछ कारण सामने आए:
- विश्वास की कमी: जब रिश्ते में भरोसा खत्म हो जाता है, तो प्यार की जगह शक और नफ़रत जन्म ले लेती है। यह पति-पत्नी दोनों के लिए ही अभिशाप बन जाता है।
- आर्थिक दबाव: बेरोज़गारी, आर्थिक तंगी और लालच रिश्तों को कमजोर कर रहे हैं। पति या पत्नी की इच्छाओं की पूर्ति न होने पर हिंसा का रास्ता अपनाया जा सकता है।
- बाहरी संबंध: विवाहेतर संबंधों ने वैवाहिक जीवन में जहर घोल दिया है। पति किसी दूसरी स्त्री को पसंद करता है, या पत्नी किसी परपुरुष की ओर आकर्षित हो जाती है।
- संवाद की कमी: पति-पत्नी आपस में खुलकर बात नहीं करते। छोटे विवाद बड़ी खाई में बदल जाते हैं और एक दिन फूट पड़ते हैं।
- क्रोध और असहनशीलता: आज का समाज धैर्य खो चुका है। लोग तुरंत निर्णय लेते हैं, चाहे वह हिंसा ही क्यों न हो।
- कानूनी अनुपस्थिति: सज़ा की धीमी प्रक्रिया और सामाजिक भय अपराधों को अंजाम देने में मदद करती है।
- दिखावा और आधुनिकता का दबाव: व्यक्ति आगे निकलने की कोशिश में रिश्ते भूल जाता है, और समय की कमी के कारण अन्य संबंध जोड़ लेता है, जो हिंसा का कारण बनता है।
समाधान की ओर:
- संवाद की शक्ति: पति-पत्नी के बीच खुली बातचीत सबसे बड़ा हथियार है।
- काउंसलिंग और परामर्श: रिश्ते में दरार आने पर काउंसलिंग मदद कर सकती है।
- कानूनी जागरूकता: महिलाओं और पुरुषों दोनों को अपने अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए।
- संस्कार और शिक्षा: बच्चों को बचपन से रिश्तों की पवित्रता और सम्मान का महत्व सिखाना ज़रूरी है।
- धैर्य और सहनशीलता: एक-दूसरे को समझने और स्वीकार करने की आदत डालनी होगी।
निष्कर्ष:
रिश्ता अगर नफरत के चलते टूट जाए, तो समाज बिखरता है। हमें इस स्याह दास्ताँ को बदलने के लिए प्रेम, संवाद और न्याय की लौ जलानी होगी। पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज की नींव है। जब यह रिश्ता टूटता है, तो परिवार टूटते हैं और समाज कमजोर होता है। नफ़रत और हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता।
प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान ही वह रास्ता है जिससे रिश्ते सुदृढ़ और खुशहाल बन सकते हैं। अगर हम यह नहीं समझेंगे, तो “नीले ड्रम” और “ज़हर” जैसी

शाहना परवीन शान, प्रसिद्ध लेखिका, मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश)

बहुत सुंदर और विस्तृत! सोचने के लिए मजबूर करता लेख👏👏
बहुत आभार 🙏😊