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खतरनाक मृगतृष्णा

पति की आंखों का अंधकार चित्रा के जीवन में भी इस तरह उतर आया था….. वह सब कुछ जानते समझते हुए भी……समझना नहीं चाह रही थी । कुछ दिनों के लिए ही सही पर एक जिंदगी जी ली उसने ।
लेकिन इस छलावे की जिंदगी ने उसे ताउम्र कारावास भुगतने के लिए मजबूर कर दिया ….

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सुनहरा छाता

किसी को कुछ बताना भी नहीं चाहती थी। किसे बताती? कौन सुनता? आँसू तो पहले ही सूख चुके थे। वो बस उस सुनहरे छाते को देखती आगे बढ़ रही थी। शायद उसी छाते के नीचे थोड़ी गुनगुनी धूप मिले… बिना रोक-टोक… बिना बाँधन।
पर तभी एक चीख गूँजी। लोग भागकर इकट्ठे हुए। सायरन बजाती एम्बुलेंस आई और एक शरीर उठा ले गई। इस घर में उसी घर में जिसके लिए उसने अपना मायका छोड़ा… खून के रिश्ते छोड़े बस सन्नाटा फैल गया। राकेश काला चश्मा लगाकर आया और बस इतना कहा “सब ख़त्म हो गया।”

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रिश्तों का जहर: क्यों टूट रहे हैं पवित्र बंधन

पति-पत्नी का रिश्ता भारत में सबसे पवित्र और गहरा माना जाता है, लेकिन आज समाज में यह रिश्ता नफ़रत, संदेह और हिंसा का केंद्र बनता जा रहा है। पति द्वारा पत्नी पर अत्याचार, पत्नी द्वारा पति की हत्या, दहेज, संपत्ति, विवाहेतर संबंध और संवाद की कमी—ये सभी कारण रिश्तों को ज़हरीला बना रहे हैं। मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाएँ लगातार सामने आती हैं, जो रिश्तों की पवित्रता और समाज की नींव पर सवाल उठाती हैं।

समाधान संवाद, काउंसलिंग, कानूनी जागरूकता, संस्कार और धैर्य में निहित है। प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान ही वह रास्ता है जिससे पति-पत्नी के रिश्ते सुदृढ़ और खुशहाल बन सकते हैं। अगर यह समझ नहीं आया, तो समाज में “नीले ड्रम” और “ज़हर” जैसी खौफनाक घटनाएँ लगातार दोहराई जाएँगी।

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