घर में पूर्वजों की तस्वीर रखना सिर्फ श्रद्धा और स्मरण का प्रतीक नहीं है, बल्कि वास्तुशास्त्र के अनुसार यह घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने और नकारात्मकता को दूर करने का भी एक माध्यम है. सही स्थान और दिशा में पितरों की तस्वीर लगाने से परिवार की उन्नति, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है.
आइए जानते हैं वास्तुशास्त्र के कुछ खास नियम जो पितरों की तस्वीर घर में लगाने के लिए जरूरी हैं.
पितरों की तस्वीर लगाने के गलत स्थान
वास्तुशास्त्र में यह माना जाता है कि पितरों की तस्वीर को घर के मध्य (ब्रह्मस्थान), बेडरूम या किचन में नहीं रखना चाहिए. इन स्थानों पर तस्वीर लगाने से पूर्वजों का सम्मान नहीं रहता और घर के खुशहाल माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
इससे गृह क्लेश बढ़ने की संभावना रहती है. इसलिए इन जगहों पर पितरों की तस्वीर लगाने से बचें. दीवार पर तस्वीर लटकाना या स्टैंड पर रखना. अक्सर लोग पितरों की तस्वीर दीवार पर लटकाकर रखते हैं, लेकिन वास्तुशास्त्र के अनुसार यह उचित नहीं है.
तस्वीर को लकड़ी के स्टैंड या टेबल पर रखना शुभ माना जाता है. गलत स्थान पर दीवार पर लटकाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है.
तस्वीर लगाने के दृष्टिगत दिशा और स्थान
पितरों की तस्वीर को घर में ऐसी जगह पर न लगाएं जहां घर के सदस्यों की रोजाना नजर पड़े, इससे निराशा और मानसिक अशांति हो सकती है.
दक्षिण और पश्चिम दीवारों पर तस्वीर लगाना उचित नहीं माना जाता. ऐसा करने से परिवार की तरक्की रुक सकती है और कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं.एक से अधिक पितरों की तस्वीरें भी घर में न लगाएं. एक से अधिक तस्वीरें नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित कर सकती हैं और आर्थिक संकट या खुशहाली की कमी का कारण बन सकती हैं.
तस्वीर लगाने का सही दिशा
उत्तर दिशा में तस्वीर लगाएं और तस्वीर का मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए. माना जाता है कि दक्षिण दिशा पितरों की होती है. उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में भी तस्वीर रखी जा सकती है, बशर्ते स्थान दिशा दोष से मुक्त होइस प्रकार तस्वीर लगाने से परिवार के सदस्यों का जीवन संकटों और अकाल मृत्यु से सुरक्षित रहता है..
वास्तु के अनुसार प्रमुख लाभघर में सकारात्मक ऊर्जा का संंचार परिवार की उन्नति और समृद्धि मानसिक शांति और सुख-समृद्धि संकटों से सुरक्षा और परिवार में संतुलन बना रहता है.
