सिर्फ तुम चाहिए

मुझ से मिलने जब आना 

तब उतारकर आना 

तुम्हारे ब्रांडेड मिजाज,

ब्रांडेड मोजे,जूते और चश्मा भी

और पहने के आना सादगी….

वो क्या है ना 

मेरी सूती साड़ी 

घबरा जाती है, सहम जाती है

और डरने लगती है

ख़ुद के ही सादगी से

और तुम …

तुम भी तो तुम नहीं रहते

उन ब्रँड्स को संभालते 

संभालते!

और मुझे

सिर्फ़ तुमसे मिलना है

रोहिणी पांडे, लेखिका, नांदेड़

12 thoughts on “सिर्फ तुम चाहिए

  1. मेरी रचना को यहां स्थान देने के लिए बहुत शुक्रिया

  2. बहुत सादगीपूर्ण अभिव्यक्ति.
    बधाई और शुभकामना

  3. बहुत ही कम शब्दों और सरलता से अर्थ पूर्ण अभिव्यक्ति। बधाई

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