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रिश्ते कुछ जाने कुछ अनजाने से

डॉ. शशिकला पटेल

रिश्ते कुछ जाने, कुछ अनजाने से,
कुछ जन्म से, कुछ बनते हैं निभाने से।

कलियों से कोमल, फूलों से नाज़ुक हैं,
बने रहते हैं सदा मगर निभाने से।

धैर्य की डोरी से बंधे होते हैं ये,
वक़्त के थपेड़ों से टूटते नहीं हैं।

चाहे सुख हो या ग़म, हर पल साथ होते,
मज़बूत होते हैं आपस में मिलने-मिलाने से।

सच्चे दिलों से दुआएँ मिलती हैं इनमें,
चाहत से, समर्पण से, मोहब्बत से बढ़ते हैं ये।

हर चुनौती का सामना साथ में करते हैं,
जीत लेते हैं जंग एक-दूजे का हौसला बढ़ाने से।

मन की उथल-पुथल में ये शांत रहते हैं,
आंधियों में भी बिना डिगे खड़े रहते हैं।

कभी निराश होते हैं, फिर भी साथ चलते हैं,
सच्चे रिश्ते नहीं टूटते किसी के भरमाने से।

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