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क्या है मानव जीवन?

क्या है मानव जीवन?
देवता का श्राप,
असुरों का वरदान।
नदी का बहाव,
विपरीत धारा की नाव।

पर्वत-सा हौसला,
झरनों-सी भावना।
बादलों-सी वेदना,
लहरों-सी कामना।

कोयल-सा आडंबर,
कस्तूरी-सा छलावा।
मरुस्थल-सी तृष्णा,
ब्रह्मकमल-सी चेतना।

सूरज-सी करुणा,
अंबर-सा सूनापन।
नीर-सा हृदय,
क्षीर-सी बुद्धि।

पगडंडी से रास्ते,
शिखर-सी मंज़िलें।
मकड़ियों-सा भटकना,
ता-उम्र आत्मा से भागना,
अंत में भस्म बन जाना।

फिर से नवजीवन की तलाश में,
मुक्ति के सारे द्वार बंद,
अनंत काल तक…

गीता कटियार, प्रसिद्ध लेखिका, कानपुर सिटी

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