राकेश से शुभांशु तक: अंतरिक्ष में भारत का स्वर्णिम सफर

आसमान के पार भारत की नई उड़ान: इतिहास फिर दोहराया गया

शुभांशु शुक्ला जब भी मैं यह नाम सुनती हूं या पढ़ती हूं। मेरा मन 41 साल पहले 1984 में पहुंच जाता है। एक चेहरा आंखों के सामने घूमने लगता है। वह हैं हमारे भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा जिनका नाम अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर से 50 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव, बरसात के दिनों में यदि लगातार एक हफ्ता बारिश हो जाए, तो गांव का संपर्क दूसरी जगह से खत्म। ना कोई गांव से बाहर जा सकता था ना कोई अंदर आ सकता था। क्योंकि गांव के चारों तरफ भारी बारिश के कारण पानी भर जाता था और सभी सड़कों पर आवागमन बाधित हो जाता था ।
बिजली का हाल यह था कि आंधी और बारिश में बिजली के तार टूट जाए तो कुछ पता नहीं चलता था कि कब ठीक होगा ।एक हफ्ता या एक महीना यह सब ठीक होने में लग ही जाता था ।
हम बहुत भाग्यशाली थे कि उसे दिन बिजली आ रही थी।
मैं उसे समय कक्षा 8 की विद्यार्थी थी रात का खाना खाकर सोने की तैयारी थी। गाँव में बच्चे वैसे भी अपना बिस्तर जल्द ही पकड़ लेते है। इस समय मेरे भैया कुछ सामान लेने के लिए मेरे कमरे में आए और मुझसे कहा कि ,” तुम अभी सोना नहीं टेलीविजन पर अंतरिक्ष अभियान का प्रोग्राम देखेंगे ।” जागने का मन तो बिल्कुल नहीं था। लेकिन एक तरफ बिस्तर छोड़ने का लालच और दूसरी तरफ टेलीविजन पर आने वाले प्रोग्राम की जानकारी का अभाव। लेकिन भइया ने इतने अधिकार और स्नेह से टीवी देखने को कहा तो प्रोग्राम देखना तो था ही।

टीवी कॉमन प्लेस पर रखा हुआ था। थोड़ी याद धुंधली सी हो गई है बहुत ज्यादा कुछ याद नहीं आ रहा लेकिन एक दृश्य मैं कभी नहीं भूलती वह था जब हमारे देश की उसे समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा जी से पूछती हैं की अंतरिक्ष से हमारा देश कैसा दिख रहा है और फिर उधर से दिल को छू लेने वाला जवाब आता है कि सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा वह पल सभी भारतवासियों के लिए गर्व से सीना चौड़ा करने वाला था।

राकेश शर्मा जी के साथ एक और नाम था। वह था स्क्वाड्रन लीडर रवीश मल्होत्रा। इन दोनों को अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया था। परंतु अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बनने का सौभाग्य स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा जी को मिला।

उसके बाद क्या हुआ? कौन कहां पर? कुछ याद नहीं। हां कभी-कभी जिज्ञासा होती थी। जानकारी लेने की। यह काम हमारे संचार माध्यम ने पूरा किया। राकेश शर्मा जी तमिलनाडु में प्रकृति की गोद में जाकर बसे। उन्होंने कन्नूर को अपना निवास स्थान बनाया। जहां पर वे बहुत सादगी और शांतिपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
एक बार फिर से इतिहास दोहराया गया और फिर से सुनने को मिला कि आज का भारत स्पेस से निडर दिखता है। आज का भारत कॉन्फिडेंट दिखता है। आज के भारत की वजह से कह सकता हूं कि आज का भारत सारे जहां से अच्छा दिखता है। लेकिन इस बार यह शब्द राकेश शर्मा जी के नहीं है। यह है हमारे दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु मिश्रा जी के। जिनकी वजह से सभी भारतवासियों को। एक बार फिर से गर्व करने का। अफसर प्राप्त हुआ है।

अंतरिक्ष यान जिसमें शुभांशु शुक्ला अपने तीन साथियों के साथ पृथ्वी पर वापसी कर रहे थे। उनका टेलीविजन पर लाइव प्रसारण देखना बहुत ही रोमांचित अद्भुत और हर्षित करने वाला क्षण था। शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित वापसी देखकर बहुत खुशी हुई। मैं अपने को भाग्यशाली मानती हूं कि मैं प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा जी और द्वितीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला जी के इस मिशन में टेलीविजन के माध्यम से मेरी भी हिस्सेदारी रही है। यह समय हम सभी भारतवासियों के लिए एक बार फिर से गर्व करने का है ।

करुणा तोमर, प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ

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