2 से 4 अक्टूबर तक राष्ट्रीय अधिवेशन, राष्ट्र जागरण पर होगा मंथन

मुंबई से रीमा राय सिंह की रिपोर्ट
जयपुर। साहित्य और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के लिए देशभर के 300 से अधिक कवि और साहित्यकार आबू रोड में जुटेंगे। राष्ट्रीय कवि संगम का 11वां राष्ट्रीय अधिवेशन 2 से 4 अक्टूबर 2026 तक आबू रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। तीन दिवसीय अधिवेशन में संगठन की आगामी गतिविधियों के साथ साहित्य, राष्ट्र जागरण, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
अधिवेशन को राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक अध्यक्ष स्व. जगदीश जी को समर्पित किया गया है। देशभर से आने वाले कवि और साहित्यकार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में संगठनात्मक चर्चा के साथ देश के अलग-अलग राज्यों से आए कवियों की सहभागिता से काव्य गोष्ठियां और कवि सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे।
राष्ट्रीय कवि संगम के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष किशोर पारीक ने बताया कि अधिवेशन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश अग्रवाल, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बत्रा और राष्ट्रीय महामंत्री महेश शर्मा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल होंगे।
अधिवेशन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार की भी उपस्थिति रहेगी। राजस्थान विधानसभा में मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। राजस्थान की ओर से राष्ट्रीय कवि संगम के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानसभा में मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग तथा प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद पुरोहित के निर्देशन में अधिवेशन से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
प्रदेश महामंत्री विवेकानंद शर्मा ने बताया कि अधिवेशन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के मार्गदर्शन में राष्ट्र, समाज, संस्कृति और साहित्य से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम कविता और साहित्य के माध्यम से राष्ट्र जागरण, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य करता है। आबू रोड में होने वाला राष्ट्रीय अधिवेशन संगठन के लिए देशभर के कवियों और साहित्यकारों को एक मंच पर जोड़ने के साथ आगामी साहित्यिक अभियानों और गतिविधियों की दिशा तय करने का अवसर भी बनेगा।
अधिवेशन का ध्येय वाक्य ‘राष्ट्र जागरण, धर्म हमारा’ रखा गया है। तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में संगठनात्मक विमर्श और काव्य गतिविधियों के माध्यम से देशभर से आए साहित्यकारों के बीच संवाद और सहभागिता का मंच तैयार होगा।
