
विजया डालमिया, हैदराबाद
“अर्थ… मैंने कितनी बार कहा है तुमसे, मेरा पीछा मत करो। मैं तुमसे प्यार नहीं करती।”
जैसे ही आलिया ने यह बात कही, अनु की नींद खुल गई। उसने देखा, आलिया नींद में बार-बार यही बात दोहरा रही थी।
अनु ने जैसे ही उसके सिर पर हाथ रखा, आलिया चौंककर जाग उठी। पसीने से तरबतर आलिया ने अनु को अपने सामने देखा और उससे लिपटकर रोने लगी।
अनु ने उसे सहलाते हुए पूछा,
“कोई बुरा सपना देखा क्या?”
आलिया ने कुछ नहीं कहा।
अनु उसे धीरे-धीरे सहलाते हुए अपने बेड पर ले आई। कुछ ही देर में दोनों फिर नींद की आगोश में समा गईं।
सुबह-सुबह आलिया ने अनु को उठाते हुए कहा,
“गुड मॉर्निंग, मैडम! आपकी कॉफी हाज़िर है।”
कॉफी का नाम सुनते ही अनु ने आँखें खोलीं। आलिया को देखा और उचककर बैठ गई।
कॉफी पीते-पीते अनु ने पूछा,
“एक बात बता… तू ठीक तो है ना?”
आलिया ने हैरानी से पूछा,
“हाँ… क्यों?”
“कुछ नहीं।”
अनु ने कॉफी खत्म की और दोनों तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल पड़ीं।
आलिया ने थोड़े दिन पहले ही कॉलेज में एडमिशन लिया था। हॉस्टल में अनु के साथ रूम शेयर करके वह बहुत खुश थी। कुछ ही दिनों में दोनों बेस्ट फ्रेंड बन चुकी थीं।
कभी-कभी अनु आलिया को अजीब-सी नज़रों से देखती तो आलिया पूछती,
“क्या बात है?”
अनु मुस्कुराकर कहती,
“कुछ नहीं… पर पता नहीं यार, तेरी आँखों में डूब जाने को दिल करता है।”
आलिया तुरंत जवाब देती,
“नो चांस! क्योंकि यहाँ तो पहले से ही तू समाई है।”
अनु उसे चौंककर देखती और चुप हो जाती।
लेकिन कल रात की बात अनु के दिमाग से निकल नहीं रही थी।
शाम को उसने फिर आलिया से पूछा,
“आलिया… यह अर्थ कौन है?”
आलिया ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा।
“तुझे कैसे पता अर्थ के बारे में?”
“अरे, तू नींद में बार-बार उसी का नाम ले रही थी… इसलिए।”
कहते हुए अनु ने उसे गहरी नज़रों से देखा।
आलिया कुछ पल चुप रही। फिर गंभीर होकर बोली,
“क्या बताऊँ यार… वह अपने कॉलेज के पास कैफ़े हाउस है ना, वहीं पर पहली बार मुझे मिला था। यहाँ आने के बाद वह पहला शख्स था, जो हर जगह, हर बात में मेरी मदद करता रहा। चाहे कॉलेज का मामला हो या हॉस्टल के रूम का। उसी ने मुझे कहा था कि रूम नंबर 11 में तुम आराम से रह सकती हो।”
वह कुछ पल रुकी और फिर अचानक बोली,
“अच्छा, एक बात बता… क्या तुम उसे जानती हो?”
अनु सोच में पड़ गई।
फिर धीरे से बोली,
“हाँ।”
आलिया ने उसे गौर से देखा।
“वही मुझे भी लग रहा है। पर पता है, आजकल वह हर जगह मेरा पीछा करता है। पागलों की तरह मुझे देखता रहता है। और तो और… आजकल सपने में भी वह मुझे…”
कहते-कहते वह रुक गई और अनु को देखने लगी।
अनु ने तुरंत कहा,
“ऐसा नहीं हो सकता।”
“क्यों नहीं हो सकता? मैं क्या झूठ बोल रही हूँ?”
“नहीं… पर… अच्छा, एक मिनट रुक।”
अनु उठी और कुछ ही देर बाद एक तस्वीर लेकर वापस आई।
उसने तस्वीर आलिया की ओर बढ़ाते हुए कहा,
“यह देख।”
आलिया ने तस्वीर देखते ही कहा,
“अरे हाँ! यही तो अर्थ है। लेकिन तुम इसके साथ क्या कर रही हो?”
अनु ने आलिया का हाथ पकड़ लिया और उसके पास बैठ गई।
उसकी आँखों में अचानक नमी उतर आई।
“अर्थ के साथ जो लड़की तुम्हें दिखाई दे रही है ना… वह मेरी जुड़वाँ बहन तनु है।”
“ओह…”
आलिया ने तस्वीर से नज़रें हटाकर अनु को देखा।
अनु धीरे-धीरे कहने लगी,
“यह और अर्थ एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे। छह महीने पहले एक अचानक हुए एक्सीडेंट में तनु चल बसी।”
आलिया ने धीमे से कहा,
“आई एम सॉरी, अनु।”
अनु कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
“तुझे पता है, मरने से पहले उसने क्या कहा था?”
आलिया उसकी ओर देखने लगी।
“उसने कहा था—‘मेरी आँखें ज़िंदा रहें। मैं रहूँ या न रहूँ… पर किसी और के माध्यम से मैं यह दुनिया देख सकूँ। यही मेरी आख़िरी ख्वाहिश है।’”
आलिया के चेहरे पर अचानक समझ की एक रेखा उभरी।
“तभी…”
अनु ने उसकी ओर देखा।
आलिया ने धीरे से कहा,
“इसीलिए मेरी आँखें तुम्हें बहुत खूबसूरत लगती हैं।”
फिर वह कुछ पल रुकी और बोली,
“क्योंकि तुम्हें पता है… उस एक्सीडेंट के साथ ही एक और एक्सीडेंट हुआ था—मेरा। जिसने मेरी आँखें छीन ली थीं। लेकिन उसी वक्त मुझे तनु की आँखें मिल गईं… उन्हीं आँखों की बदौलत आज मैं यह दुनिया देख पा रही हूँ।”
कहते-कहते आलिया ने अनु को गले लगा लिया।
लेकिन अनु की आँखों में आँसू थे।
आलिया ने धीरे से पूछा,
“पर… अर्थ?”
अर्थ का नाम लेते ही अनु की आवाज़ जैसे किसी गहरे कुएँ से आई—
“अर्थ की तो उस एक्सीडेंट में ऑन द स्पॉट ही डेथ हो गई थी।”
आलिया स्तब्ध रह गई।
अनु ने उसकी ओर देखा और धीमे से कहा,
“डरो मत, आलिया…”
वह कुछ पल रुकी।
फिर आलिया की आँखों में देखते हुए बोली—
“अर्थ तुम्हें सिर्फ इसलिए दिखाई देता है… क्योंकि तनु की आँखों में अर्थ हर पल बसता था।”
आलिया की आँखों से आँसू बहने लगे।
अनु ने उसका हाथ थाम लिया और कहा—
“तनु चली गई… अर्थ भी चला गया… लेकिन उनकी मोहब्बत नहीं गई।”
कुछ पल के लिए कमरे में खामोशी छा गई।
फिर अनु ने आलिया की आँखों में देखते हुए कहा—
“तनु की आँखों में अर्थ हर पल बसा था… है… और रहेगा।
शायद इसलिए… उसकी आँखों की चाहत अब तुम्हारी आँखों से दुनिया देख रही है।”
