
सपना परिहार, नागदा जंक्शन
हमें आज़ाद हुए इतने वर्ष बीत गए। हम निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते गए, हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की और आधुनिक दौर में आ पहुँचे। देश ने हमें वे सभी सुविधाएँ प्रदान कीं, जिनकी हमें आवश्यकता थी। हम निरंतर ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते गए और विश्व पटल पर अपने देश का परचम लहराता हुआ देखा। हम इस देश के ऋणी हैं, जिसने हमें स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया और आत्मनिर्भर बनाया।
लेकिन अब, जब हमारी बारी आई है, तो हम अपने देश को क्या दे रहे हैं? अपराध, मानसिक विकृति, अभद्रता, हिंसा, गंदगी, अपनी ही धरोहरों की हानि और न जाने क्या-क्या! क्या हमने कभी सोचा है कि एक सुंदर समाज और देश को बनाने में कितनी मेहनत लगती है? कितना सहनशील होना पड़ता है और कितनी चीज़ों को सहेजना पड़ता है?
स्वतंत्रता दिवस आते ही हम सभी में आज़ादी का जोश भर जाता है। रैलियाँ निकाली जाती हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, देशभक्ति के गीत गाए जाते हैं, तिरंगा फहराया जाता है और बड़े उत्साह से आज़ादी का पर्व मनाया जाता है। परंतु इसका परिणाम क्या निकलता है?
अगले ही दिन हम साल भर के लिए सब कुछ भूल जाते हैं। सड़कों पर गाड़ियों के शोर और भीड़ के साथ उत्साह दिखाना तो आसान है, लेकिन अगले ही दिन सुबह से शाम तक सफ़ाई कर्मचारी हमारे द्वारा फैलाए गए कचरे को साफ़ करते-करते थक जाते हैं। जिस तिरंगे को हम एक दिन पहले बड़े गर्व से लेकर निकले थे, वही तिरंगा अगले दिन कहीं कचरे में पड़ा मिलता है—कोई उसे पूछने वाला तक नहीं होता।
क्या यही आज़ादी है?
आज बातचीत में अभद्र भाषा का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। आज़ादी के नाम पर ऐसे कार्य किए जा रहे हैं, जो सर्वथा अनैतिक हैं, परंतु इसकी जवाबदेही कोई नहीं लेता। हर कोई यही तर्क देता है कि, “यह हमारा अधिकार है, हम आज़ाद हैं और कुछ भी कर सकते हैं।” क्या आज़ादी का मतलब दूसरों के घर के सामने कचरा फेंकना, सड़कों पर थूकना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और रैलियों के नाम पर पूरे शहर की व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करना है? क्या यही आज़ादी का मूलमंत्र है?
क्या हमने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि इस आज़ादी के बदले हमने देश को क्या दिया? क्या कभी अपने शहर को साफ़ करने में योगदान दिया? क्या सड़कों पर सफ़ाई रखी, सफ़ाई कर्मचारियों को सम्मान दिया या अपने आसपास के माहौल को बेहतर बनाने की कोशिश की? शायद बहुत-से लोगों ने ऐसा नहीं किया, और जिन कुछ लोगों ने किया, वे वास्तव में बधाई के पात्र हैं।
इसलिए, अगली बार जब आपके मन में देशभक्ति का जज़्बा जागे, तो देश को कुछ देने का संकल्प लें—और इसकी शुरुआत अपने घर से करें।
माता-पिता का सम्मान करें।
लोगों के साथ शिष्टाचार से पेश आएँ।
अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें।
अपने शहर को उन तमाम बुराइयों से दूर रखें, जो हमें और हमारे समाज को दूषित करती हैं।
अच्छा कार्य करें, दूसरों को सम्मान दें और स्वयं भी सम्मान पाएँ। अगली बार जब स्वतंत्रता दिवस मनाएँ, तो केवल तन से नहीं, बल्कि मन से भी इस देश और अपनी आज़ादी से जुड़ी हर चीज़ का सम्मान करें।
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
