30 साल बाद भी कायम है श्याम सिंह का साथ

दो बचपन के दोस्त वर्षों बाद मिलते हुए, सच्ची दोस्ती और पुराने रिश्ते को दर्शाता भावनात्मक दृश्य।

सच्ची दोस्ती की कहानी: तीसरी कक्षा से आज तक कायम है रिश्ता

आशीष सोलंकी, कम्प्यूटर इंजीनियर, गरोठ

कहते हैं कि जिंदगी में बहुत से लोग मिलते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे बन जाते हैं जो समय के साथ और भी गहरे होते जाते हैं। ऐसे रिश्तों को किसी पहचान, हैसियत या परिस्थिति की जरूरत नहीं होती। वे सिर्फ विश्वास, अपनापन और दिल की सच्चाई से बनते हैं। मेरे जीवन में ऐसी ही अनमोल दौलत है मेरा दोस्त श्याम सिंह।

हमारी दोस्ती की शुरुआत तीसरी कक्षा से हुई थी। वह पास के एक छोटे-से गाँव से पढ़ने के लिए स्कूल आता था। वह एक मेहनती किसान परिवार से था। घर की आर्थिक स्थिति भले ही सामान्य थी, लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान और व्यवहार की सादगी हमेशा उसे सबसे अलग बनाती थी।

आज भी मुझे स्कूल का वह दिन याद है, जब पूरी कक्षा का फोटोशूट होना था। उस समय श्याम के पास स्कूल की यूनिफॉर्म नहीं थी। शिक्षक ने उसे अपनी कुर्सी के पीछे खड़ा कर दिया, ताकि तस्वीर में केवल उसका चेहरा दिखाई दे और यूनिफॉर्म नजर न आए। शायद उस पल उसके मन को थोड़ी ठेस लगी होगी, लेकिन उसने कभी अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

श्याम की सबसे बड़ी खूबी थी उसका सरल स्वभाव और दोस्ती निभाने का अंदाज। वह अक्सर अपने खेत से मेरे लिए ताजे भुट्टे लेकर आता था। उसके हाथों से लाए गए वे भुट्टे मेरे लिए किसी बड़े उपहार से कम नहीं होते थे। उनमें सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि दोस्ती का प्यार और अपनापन छिपा होता था।

मैं भी अक्सर उसके गाँव जाया करता था। वहाँ के लोग मुझे अपने परिवार का हिस्सा मानते थे। श्याम के परिवार और गाँव वालों का स्नेह मुझे हमेशा यह एहसास कराता था कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, दिल के भी होते हैं।

समय बीतता गया। स्कूल की यादें पीछे छूट गईं, जीवन में नई जिम्मेदारियाँ आईं, रास्ते बदले, लेकिन हमारी दोस्ती की डोर कभी कमजोर नहीं हुई। आज हमारी दोस्ती को लगभग 30 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी हम पहले की तरह एक-दूसरे से मजाक करते हैं, छोटी-छोटी बातों पर लड़ते हैं और फिर उसी अपनापन के साथ साथ खड़े हो जाते हैं।

सच्ची दोस्ती की यही पहचान होती है- जहाँ दिखावा नहीं होता, स्वार्थ नहीं होता, बस एक-दूसरे के लिए सम्मान और विश्वास होता है।

श्याम सिंह मेरे लिए सिर्फ एक दोस्त नहीं, बल्कि जीवन की वह खूबसूरत याद है जिसने मुझे सिखाया कि इंसान की पहचान उसके धन या परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके दिल और व्यवहार से होती है।

आज मुझे गर्व है कि मेरे जीवन में श्याम जैसा सच्चा दोस्त है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हमारी यह दोस्ती हमेशा यूँ ही मुस्कुराती रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए सच्ची मित्रता की एक मिसाल बनी रहे।

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