
डाॅ उर्मिला सिन्हा
आज गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आप सभी को सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।
प्रथम सुमिरन अपनी जन्मदात्री को, जिन्होंने नौ महीने गर्भधारण कर प्रसव पीड़ा सह हमें जन्म दिया, स्तनपान कराकर हमारी क्षुधा शांत की तथा हमें चलना, बोलना और दुनिया का सामना करना सिखाया। हम कितने भी योग्य और उम्रदराज़ हो जाएँ, प्यारी माँ के समक्ष अबोध बालक ही रहेंगे। माँ का पहला प्रश्न होता है— “खाना खाया? क्या खाया?” उस ममतामयी जननी को दिल से नमन।
“अगला जनम भी, माँ, मैं तुम्हारी ही कोख से जन्म लूँ।”
यही दृढ़ विश्वास बलवती है।
पिता, जिन्होंने हमें पढ़ाया-लिखाया और इस योग्य बनाया कि हम अपने पैरों पर स्वाभिमान के साथ खड़े होकर समाज का महत्त्वपूर्ण अंग बन सकें।
पितृऋण से हम कभी उऋण नहीं हो सकते। पूज्य पिता के चरणों में सादर प्रणाम।
धरती माँ, जिन्होंने हमें शरण दी तथा हमारे भोजन एवं जीवन-यापन की आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराईं। उस वसुंधरा को नमन।
हमारे गुरु, जिन्होंने हमें प्रभु की महिमा से अवगत कराया, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, विष्णु और महेश की विराट लीला का ज्ञान कराया। उन गुरु को हृदय से अभिनंदन।
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
हम नमन करते हैं उन तमाम बड़े-छोटे व्यक्तित्वों को, जिनसे हम नित्य-प्रतिदिन कुछ न कुछ सीखते हैं।
बंदउँ गुरु पद कंज, कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज, जासु बचन रवि कर निकर।।
परम पूज्य गुरुओं को शत-शत नमन।
ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
आज गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मीठी खीर अवश्य बनाएँ और गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करें।
