“शिक्षा खरीदी जा सकती है, लेकिन संस्कार विरासत में ही मिलते हैं।”

अनामिका सिन्हा पाठक ‘अर्श ‘
हाल के कुछ घटनाक्रमों के बाद यह प्रश्न उठाया जाने लगा है कि क्या भारत का Gen Z वास्तव में गाली-गलौज और अभद्र भाषा की ओर बढ़ रहा है? मेरा मानना है कि कुछ लोगों के व्यवहार के आधार पर पूरी पीढ़ी का आकलन करना उचित नहीं है।
मेरे अपने परिवार में भी Gen Z के युवा हैं। वे बेबाक हैं, मुखर हैं, आत्मविश्वासी हैं और अपने विचार खुलकर रखते हैं, लेकिन न तो गाली-गलौज करते हैं और न ही बदतमीजी को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम मानते हैं।
इस विषय पर मैंने अपने परिवार के युवाओं के साथ-साथ कुछ अन्य मेधावी विद्यार्थियों से भी चर्चा की, जिन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनका स्पष्ट मत था कि अपनी बात रखने के लिए गालियों की आवश्यकता नहीं होती। उनका मानना है कि “विद्या ददाति विनयम्” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसके साथ संस्कार और विनम्रता भी जुड़ी हो।
उनका कहना था कि आत्मविश्वासी व्यक्ति अपनी बात तर्क, संवाद और संयम से रखता है। गाली-गलौज अक्सर तब सामने आती है, जब संवाद की जगह आक्रोश हावी हो जाता है।
इन युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी कठिन परिस्थितियों का भी धैर्यपूर्वक सामना किया। उन्होंने निराशा में डूबने के बजाय अपनी ऊर्जा पढ़ाई पर केंद्रित की और बेहतर परिणाम प्राप्त किए। ऐसे युवाओं को देखकर विश्वास होता है कि भारत का वास्तविक Gen Z परिश्रमी, जागरूक और जिम्मेदार है।
यह भी सत्य है कि हाल के दिनों में कुछ सार्वजनिक आयोजनों और सोशल मीडिया पर अशोभनीय भाषा तथा अभद्र व्यवहार की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है। ऐसे व्यवहार से न केवल संबंधित व्यक्तियों की छवि प्रभावित होती है, बल्कि व्यापक स्तर पर युवाओं के बारे में भी गलत संदेश जाता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
यदि कोई व्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में अश्लीलता, अभद्रता या कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, किसी भी एक समूह के कुछ लोगों के आचरण के आधार पर पूरी पीढ़ी को कठघरे में खड़ा करना भी उचित नहीं है।
भारत का भविष्य उसके संस्कारी, शिक्षित और जिम्मेदार युवाओं के हाथों में है। आज भी देश में ऐसे लाखों Gen Z युवा हैं, जो अपनी मेहनत, प्रतिभा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से समाज और राष्ट्र का नाम रोशन कर रहे हैं। यही भारत के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी आशा है।
