
विजया डालमिया, हैदराबाद
सफर हमेशा रोचकता लिए हुए होते हैं। मन जब ट्रेन की पटरी के साथ हवा में गुनगुनाते हुए सफर करता है, तो भीतर की हर बात बाहर आकर उसके साथ मुस्कुराने लगती है। कितने ही जाने-पहचाने चेहरे और भूले-बिसरे किस्से हमारे साथी बन जाते हैं। हमेशा ज़रूरी नहीं कि रिश्तेदार ही आसपास हों। कुछ अनजान चेहरे भी जेहन में बस जाते हैं और फिर कभी-कभी अचानक बिजली की तरह अंधेरी रातों में चमक उठते हैं। ऐसे ही एक सफर में ले चलती हूँ आपको अपने साथ।
बात काफी पुरानी है। तकरीबन 25 साल पहले की। मैं कई बार सफर में अकेली होती हूँ। अपने इस अकेलेपन से बचने के लिए मैं आसपास के माहौल से जुड़ने की कोशिश करती हूँ और इसमें बड़ा मज़ा भी आता है। ऐसे ही एक बार, जब मैं खिड़की से बाहर देखते हुए चाय का आनंद ले रही थी, तभी पायल की छम-छम और चूड़ियों की खन-खन ने मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पलटकर देखा तो एक जोड़ा नज़र आया। शायद नई-नई शादी हुई थी। उन्हें देखकर मैं मुस्कुरा दी। प्रत्युत्तर में लड़का भी मुस्कुरा उठा। यह मुस्कुराहट भी बड़ी कमाल की होती है। एक ही पल में पराए को अपना बना देती है।
लड़के ने पूछा—
“आप कहाँ जा रही हैं, आंटी?”
“नागपुर। और तुम?”
“हम दिल्ली जा रहे हैं।”
लड़की खामोशी से सिर झुकाए बैठी थी। मैं देख रही थी कि लड़का बार-बार उसे कुछ कहता, पर वह उदास, गुमसुम-सी कहीं अपने में ही खोई हुई थी। लड़का बात करते-करते उसका हाथ पकड़ लेता और वह धीरे से हाथ हटाकर खिड़की से बाहर देखने लगती। मैं चूँकि सामने ही बैठी थी, इसलिए उनकी बातों के कुछ अंश मेरे कानों में भी पड़ रहे थे। मैंने जो समझा, वह यह था कि लड़की कुछ खफा थी और लड़का उसे मना रहा था। यह देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि यही मान-मनुहार रिश्तों को जीवित रखती है।
मैंने लड़की से बात करनी शुरू कर दी। उससे पूछा कम और अपने बारे में बताना शुरू कर दिया, जिससे वह थोड़ी-थोड़ी बात करने लगी। मैंने कुछ मज़ेदार किस्से सुनाए, जिससे वह और सहज हो गई। लड़का भी अब ज़्यादा सहज नज़र आने लगा, क्योंकि लड़की मंद-मंद मुस्कुरा रही थी।
तब मैंने धीरे से कहा—
“मुस्कुराती हुई तुम कितनी खूबसूरत दिख रही हो।”
यह सुनकर वह शरमा गई। लड़का कहने लगा
“आंटी, मैं भी इससे यही कहता हूँ, पर यह बात-बात पर मुँह फुला लेती है।”
मैंने लड़के से कहा—
“यह मुँह फुलाना नहीं, तुम्हारे प्रति इसका प्रेम है।”
यह सुनकर लड़की ने लड़के की तरफ विजयी मुद्रा में देखा और कुछ ज़्यादा ही आश्वस्त हो चली।
मैंने लड़के से फिर कहा
“तुमने कभी इसके रूठने की वजह जानने की कोशिश की है?”
वह कहने लगा
“हमारी जॉइंट फैमिली है। सब पुराने विचारों के हैं। इसी वजह से ये सारी प्रॉब्लम है। मैं इसे यही समझाता हूँ कि थोड़ा समय दो, सब ठीक हो जाएगा। पर यह ज़िद पकड़े बैठी है कि मुझे सबके साथ नहीं रहना। अब आप ही बताइए, आंटी, मैं शादी के बाद तुरंत ऐसा कैसे कर सकता हूँ?”
कहते हुए उसके चेहरे पर बेबसी झलक आई, क्योंकि समस्या प्रेम और परिवार दोनों की थी। वह दोनों को ही ईमानदारी से प्राथमिकता दे रहा था, जो मुझे अच्छा लगा।
आगे उसने फिर कहा—
“यह रूठकर मायके जा रही है। आप समझाइए न इसे।”
उसकी यह मासूमियत मेरे दिल को छू गई। मैंने लड़की की ओर देखा और कहा—
“अरे, यह सब प्रॉब्लम तो मेरे साथ भी थी और लगभग सभी के साथ होती है। मनाने वाला हो, तो रूठना भी अच्छा लगता है।”
यह सुनते ही दोनों मुस्कुरा दिए।
मैंने फिर कहा
“कभी जब बारिश होती है, तो उसके साथ हवा, आँधी और ओले भी आते हैं। हवा में हम बहते हैं। आँधी से आँखों में धूल भर जाती है, तब हमें कुछ दिखाई नहीं देता। और ओलों की ठंडक हमें प्रफुल्लित करती है, क्योंकि तेज बारिश के बाद आसमान का साफ होना निश्चित है।”
दोनों मेरी बात बहुत ध्यान से सुन रहे थे। मैंने कहना जारी रखा—
“बारिश के बाद ही धूप और साफ आसमान में हम इंद्रधनुष देख पाते हैं। उसमें भी हर तरह के रंग दिखाई देते हैं। ज़रूरी नहीं कि सभी रंग सबको पसंद आएँ, फिर भी इंद्रधनुष खूबसूरती की मिसाल है। परिवार भी कुछ ऐसा ही है। सबके अपने-अपने स्वभाव होते हैं, किंतु जब साथ रहते हैं, तो हर समस्या के बाद इंद्रधनुष की तरह खिल उठते हैं। न आँधी हमेशा रहती है, न बारिश। लेकिन यह निश्चित है कि इनके थमते ही खुशियों का इंद्रधनुष अवश्य खिलेगा।
अकेले कोई फुलवारी सुंदर नहीं दिखती। हर तरह के फूल खिलकर उसे सुंदरता प्रदान करते हैं। ससुराल भी वही फुलवारी है, जहाँ हमें महकने के लिए प्रेम, धैर्य और कर्म की खाद की आवश्यकता होती है।”
तभी लड़के ने कहा
“आंटी, आप कितनी अच्छी बातें करती हैं।”
मैंने मुस्कुराकर कहा
“तुम दोनों की जोड़ी कितनी सुंदर दिखती है!”
यह सुनते ही दोनों ने एक-दूसरे की ओर प्रेम और विश्वास से देखा।
मेरा भी स्टेशन आ चुका था। मैंने प्यार से दोनों को देखा और कहा
“चलो, अपना ख्याल रखना।”
तभी दोनों ने झुककर मेरे चरण स्पर्श किए और कहा—
“आप हमें हमेशा याद रहेंगी।”
और वे चल पड़े आगे, एक नए सफर के लिए…
तेज़ हवा के साथ जब बारिश होती है, तो बहुत कुछ बह जाता है।
आँधी के साथ बारिश भटक जाती है,
और ओलों के साथ बारिश दिशाहीन हो जाती है…

लाजवाब!
बहुत प्यारी रचना 👌