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भारतीय ट्रेन के डिब्बे में खिड़की के पास बैठी एक महिला सहयात्री मुस्कुराते हुए एक नवविवाहित दंपती से बातचीत कर रही है। बाहर हरियाली और बारिश का मौसम दिखाई दे रहा है, जो आशा, प्रेम और नए रिश्तों का प्रतीक है।

मुसाफ़िर और मोहब्बत

कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी सीख अपने नहीं, बल्कि सफर में मिले अनजान लोग दे जाते हैं। यह मार्मिक रेल यात्रा संस्मरण एक नवविवाहित दंपती और एक सहयात्री के बीच हुए संवाद के माध्यम से प्रेम, धैर्य, संयुक्त परिवार और रिश्तों की खूबसूरती को उजागर करता है। कहानी बताती है कि रिश्तों में आने वाली कठिनाइयाँ स्थायी नहीं होतीं। धैर्य, संवाद और विश्वास से हर संबंध इंद्रधनुष की तरह फिर से रंगों से भर सकता है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगी, जिसने कभी जीवन के किसी सफर में अनमोल इंसान और अनमोल सीख पाई हो।

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फ़र्क

एक पल में तान्या का भरोसा टूट गया और माँ दुर्गा जाग उठीं। जिस चेहरे को उसने पिता का रूप मान लिया था, वही चेहरा बच्चों की सुरक्षा पर सवाल बन गया। उस दिन उसे समझ आया—रिश्ता होना और रिश्ता दिखना, दोनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क होता है।

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स्टेशन पर तुलेगा सामान, एक्स्ट्रा लगेज पर ज्यादा किराया

अब रेल यात्रा के दौरान अतिरिक्त सामान ले जाना महंगा पड़ सकता है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार, 17 दिसंबर को लोकसभा में स्पष्ट किया कि ट्रेन में तय सीमा से अधिक सामान ले जाने पर यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

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अनोखा प्यार

तूफ़ान मेल की छुक-छुक के बीच अचानक अर्जुन की नज़र एक जानी-पहचानी खुशबू पर ठहरी वह निशा थी। छह वर्षों का सन्नाटा पलभर में टूट गया। उम्र की सफेदी बालों में उतर आई थी, पर भावनाओं की गरमी अब भी वही थी। कॉलेज के दिनों का प्रेम, एक गलती से टूटा संबंध, और फिर ट्रेन में यूँ अनायास मिलना.दोनों के भीतर दबा हुआ प्यार फिर से जाग उठा। आधी रात की लंबी बातचीत के बाद अर्जुन ने हाथ बढ़ाया-“मेरे साथ उतरना चाहोगी?” निशा ने बिना झिझक अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया। पुराने ग़िले धुल गए थे; दो अकेली ज़िंदगियाँ फिर से एक-दूसरे को पा चुकी थीं।

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