Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
भारतीय ट्रेन के डिब्बे में खिड़की के पास बैठी एक महिला सहयात्री मुस्कुराते हुए एक नवविवाहित दंपती से बातचीत कर रही है। बाहर हरियाली और बारिश का मौसम दिखाई दे रहा है, जो आशा, प्रेम और नए रिश्तों का प्रतीक है।

मुसाफ़िर और मोहब्बत

कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी सीख अपने नहीं, बल्कि सफर में मिले अनजान लोग दे जाते हैं। यह मार्मिक रेल यात्रा संस्मरण एक नवविवाहित दंपती और एक सहयात्री के बीच हुए संवाद के माध्यम से प्रेम, धैर्य, संयुक्त परिवार और रिश्तों की खूबसूरती को उजागर करता है। कहानी बताती है कि रिश्तों में आने वाली कठिनाइयाँ स्थायी नहीं होतीं। धैर्य, संवाद और विश्वास से हर संबंध इंद्रधनुष की तरह फिर से रंगों से भर सकता है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगी, जिसने कभी जीवन के किसी सफर में अनमोल इंसान और अनमोल सीख पाई हो।

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इंदौर में साहित्यिक सम्मान प्राप्त करती कवयित्री, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन की आध्यात्मिक यात्रा

शब्दों की साधना, शिव की आराधना

साहित्यिक सम्मान, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन तथा इंदौर की सांस्कृतिक समृद्धि से सजी यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार आध्यात्मिक और साहित्यिक उपलब्धियों में से एक बन गई।

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शिर्डी यात्रा और हिंदी साहित्यिक अधिवेशन में शामिल साहित्यकारों और साथियों के साथ बिताए आत्मीय और यादगार पल।

यात्रा, जो लौटकर भी साथ रही

हिंदी साहित्य भारती के शिर्डी अधिवेशन की यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मित्रता, आत्मीयता, जिम्मेदारियों और यादों से भरा जीवन का सुंदर अनुभव बन गई।

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गोवा के समुद्र तट पर परिवार के साथ बिताए भावनात्मक पल

वाह… गोवा… वाह !

गोवा की यह यात्रा शोर-शराबे से ज़्यादा स्मृतियों की शांति है। समुद्र की लहरें, माँ की यादें, पोते की ज़िद और परिवार के साथ बिताए पल—यह संस्मरण गोवा को महसूस करने की एक भावनात्मक कोशिश है।

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बेटी के संग अनदेखे शहर की दहलीज़ पर

“अभी तो उस नन्हें हाथ के कोमल स्पर्श का एहसास मेरे हथेली से गया ही नहीं और पलक झपकते इतने वर्ष बीत गए कि अब उसी नन्हीं परी से हाथ छुड़ाते उसे एक परिपक्व छात्रा के तौर पर एक अंजान शहर में उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने भेज रही थी। मन में असंख्य भाव उठ रहे थे, पर चेहरे पर दृढ़ता का आवरण ओढ़े मैंने सिर्फ बेटी के आत्मविश्वास को सँभालने की कोशिश की। शाम होते-होते जहाज के पहिए उस नए शहर की धरती पर रुक गए और दिल से निकली बस एक ही दुआ – ‘हे प्रभु! मेरी बेटी की राहें हमेशा सुगम और सफल बनाना।'”

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मेरी नजरों में नेपाल — जैसा देखा, जैसा समझा

“अगर अलग मुद्रा की पहचान न होती, तो कभी न जान पाती कि किसी और ज़मीन पर हूँ!”
नेपाल—एक ऐसा देश, जहाँ हर गली, हर मोड़ पर आस्था की झलक है। साधारणता में भी गरिमा है, और गरीब कहलाने के बावजूद आत्मसम्मान की ऐसी मिसाल देखने को मिली जो अमीर देशों को भी सीख दे सके। महिलाएं व्यापार की कमान संभालती हैं, ईमानदारी हर चेहरे पर झलकती है, और हिंदी को जिस तरह से अपनाया गया है, वह दिल को छू जाता है। यह यात्रा केवल एक देश की नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव की रही।

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