Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

मेरी नजरों में नेपाल — जैसा देखा, जैसा समझा

अगर अलग मुद्रा की पहचान न होती, तो कभी न जान पाती कि किसी और ज़मीन पर हूँ!नेपाल एक ऐसा देश जिसे देखकर दिल में यह ख्याल आया कि यह भारत का ही कोई सुंदर, शांत और स्वाभिमानी हिस्सा है. पहाड़ों की गोद में बसा, मंदिरों की घंटियों से गूंजता और संस्कृति की जड़ों से जुड़ा हुआ यह देश, मेरे लिए किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं रहा.नेपाल दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र है. यहां की गलियों से लेकर बाजारों तक, मंदिरों से लेकर लोगों के नामों तक हर जगह धर्म और आस्था की खुशबू रची-बसी है. हर मोड़ पर एक मंदिर है, हर पत्थर में आस्था है और हर चेहरे पर श्रद्धा.इतिहास में जब अनेक राष्ट्र अंग्रेजी उपनिवेशवाद की चपेट में आ चुके थे, नेपाल ने अपनी अध्यात्मिक शक्ति के बल पर न केवल स्वतंत्रता बनाए रखी, बल्कि आत्मसम्मान के साथ दुनिया के सामने खड़ा रहा.

गरीब मगर आत्मसम्मानीअक्सर कहा जाता है कि नेपाल एक गरीब देश है, पर मेरी नजरों में यह सबसे अमीर देशों में से एक है चरित्र, आत्म-सम्मान और संस्कारों के मामले में्.नेपाल में एक भी भिखारी नजर नहीं आया. क्या सच में गरीबी वही है जहॉं आत्मसम्मान न हो? वहॉं के बच्चे तक बिना किसी औपचारिक शिक्षा के करेंसी एक्सचेंज का गणित फटाफट समझा देते थे १०० भारतीय रुपये के बदले १६० नेपाली रुपये!सादगी, इमानदारी और अनुशासननेपाल की खास बात है वहॉं के लोगों की ईमानदारी. दुकानों में सामान बाहर खुले में रखा होता है, कोई ताले नहीं, कोई निगरानी नहीं और फिर भी कोई कुछ छूता तक नहीं्. वहॉं की पुलिस भी बेहद सभ्य और सहयोगी रही.

शहर की दिनचर्या भी समयबद्ध थी. सुबह ८ बजे लोग भोजन शुरू कर देते हैं और रात ९ बजे तक होटल्स के गेट तक बंद हो जाते हैं्. देर से खाने वालों को शायद भूखे ही सोना पड़े!नेपाल की महिलाएं हर क्षेत्र में सक्रिय नजर आईं्. बाजार की अधिकांश दुकानों को महिलाएं ही संभाल रही थीं्. उनमें एक अलग ही स्मार्टनेस और आत्मनिर्भरता झलक रही थी.

हर होटल, हर दुकान में शराब की विविध ब्रांड्स उपलब्ध थीं, लेकिन एक भी व्यक्ति नशे में सड़क पर गिरता नहीं दिखा. यह आत्मनियंत्रण और सामाजिक अनुशासन की मिसाल है.हिंदी का संरक्षणनेपाल में एक और सुखद अनुभव यह रहा कि वहां की नंबर प्लेट्स हिंदी में, कैलेंडर हिंदी में, और अंक भी हिंदी में होते हैं्. इस आधुनिकता की दौड़ में जहां कई देशों ने अपनी भाषाई पहचान खो दी, नेपाल में हिंदी का संरक्षण देख मन गदगद हो गया.हर चौथे होटल में पब था जहां लोग अपनी पसंद के गाने डिमांड कर सकते थे. वहां भारतीय, थाई, कोरियन, यूरोपियन पब तक मौजूद थे. यह नेपाल की विविधता को दर्शाता है, साथ ही ये भी कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती है.अंत मेंनेपाल एक छोटा देश ज़रूर है, पर आत्मबल और संस्कृति के मामले में बहुत बड़ा है. एक देश जिसने अपनी पहचान, अपनी स्वतंत्रता और अपनी आत्मा को जिंदा रखा है एक प्रेरणादायक यात्रा रही यह मेरे लिए्.

सीमा राय, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, लखनऊ

One thought on “मेरी नजरों में नेपाल — जैसा देखा, जैसा समझा

  1. सीमा राय जी ने नेपाल की जो तस्वीर इस संस्मरण के माध्यम से खींची है वह पाठक के मन में निश्चय ही वहां जाने का आग्रह करती नज़र आती है। नेपाल की संस्कृति, आस्था और समाज से लेखिका ने जिस खूबसूरती के साथ परिचय कराया है वह बेहद प्रभावशाली है। लेखिका को बधाई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *