
किरण अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
पहाड़-पर्वत सिर्फ देख रहे हैं,
नदियाँ बह रही हैं।
चाँद कभी आधा, कभी पूरा निकलता-छिपता है।
दरिया का पानी भी
सूख चुका है।
सब कुछ तो है यहाँ,
लेकिन सोच से विपरीत।
लोग हँस रहे हैं,
उनकी हँसी में हँसी नहीं।
किसी की हँसी में खीज है,
तो किसी की हँसी में अभिनय।
इन सबको
सूक्ष्मता से देखने वाला
मौन है,
और यही मौन
उसके मस्तिष्क की
दावानल-स्थिति है।
निश्चित ही इसका परिणाम
अप्रत्याशित होगा।
कौन बचेगा, कौन नहीं,
कौन कह पाएगा!
लेखिका के बारे में-
किरण अग्रवाल
समकालीन हिंदी साहित्य की एक संवेदनशील, सृजनशील एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। 25 दिसंबर 1977 को हरियाणा के खेड़ी ग्राम में जन्मी किरण जी ने जीवन के विविध अनुभवों, भावनाओं और सामाजिक सरोकारों को अपनी लेखनी के माध्यम से सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की है।संगीत, नृत्य, लेखन और बागबानी में विशेष रुचि रखने वाली किरण अग्रवाल हिंदी, नेपाली, अंग्रेज़ी और मारवाड़ी भाषाओं का ज्ञान रखती हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व और सृजन को व्यापक दृष्टि प्राप्त हुई है। वर्तमान में उत्तरायण, सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग) में निवासरत किरण जी साहित्यिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे सिलीगुड़ी महिला काव्य मंच की अध्यक्ष तथा “सवेरा सेवा संस्था” की अध्यक्ष के रूप में साहित्य और समाज सेवा दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं की गहराई, जीवन के सूक्ष्म अनुभवों की सहज अभिव्यक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। उनके काव्य-संकलन ‘ओझल दर्पण’ और ‘कल्पनाओं की मुंडेर’ पाठकों के बीच विशेष रूप से सराहे गए हैं। उनकी लेखनी भावनाओं को शब्दों का ऐसा स्वर देती है जो पाठकों के मन में लंबे समय तक गूंजती रहती है।
