साहित्य वातावरण LIVE WIRE NEWS NETWORK2 months ago2 months ago01 mins यह कविता प्रकृति की स्थिरता और मनुष्य की कृत्रिमता के बीच के गहरे विरोधाभास को उजागर करती है। हँसी के पीछे छिपी पीड़ा, अभिनय और आंतरिक तनाव को रेखांकित करती यह रचना मौन की उस शक्ति को सामने लाती है, जो कभी-कभी शब्दों से कहीं अधिक मुखर होती है। Read More