
नीलम पेड़ीवाल, जमशेदपुर (झारखंड)
माँ दुर्गा सुखदायिनी,
जग की तारणहार।
सब तेरी पूजा करें,
सरस हृदय उद्गार।।
मैया के नौ रूपों को,
पूजे यह संसार।
घर-घर माँ की पूजा होती,
और होता सत्कार।।
माँ अम्बे करुणामयी,
आए हैं तेरे द्वार।
हम सबकी करुणामयी,
सुनो माँ पुकार।।
लक्ष्मी, सरस्वती, भवानी हो,
माँ दुर्गा, तुम महाकाली हो।
भक्तों की लाज बचाती हो,
दुखड़े दूर कर जाती हो।।
इस धरती पर पाप बहुत है,
आप आकर मिटाओ माँ।
हे मेरी मात भवानी,
सकल विश्व का कल्याण करो।।
दीन-दुखियों के दुख हर लेती,
दुष्टों का संहार करती।
जग की तारणहार माँ,
चहुँदिस गूँजे जयकारा माँ।।
खाली झोली सबकी भरती,
पीड़ा आप सभी की हरती।
पूर्ण करती कामना,
करते हम सब साधना।।
वंदन करता आज हर जन,
पुकार रहा है मेरा मन।
माँ गौरी, स्वीकार करो,
पीड़ा सबकी आज हरो।।
कृपा करो माँ अम्बे सब पर,
दया करो माँ हम सब पर।
तेरे द्वारे हम आए हैं,
हम सबका उद्धार करो।।
माँ, जब कृपा तुम्हारी होगी,
ज्ञान की वर्षा तब होगी।
अँधियारा जब मिट जाएगा,
दर्शन आपका मन पाएगा।।
मैया मेरी, साथ रहो तुम,
नैया सबकी पार करो तुम।
विपदा सबकी हर लेना माँ,
आशीष अपना दे देना माँ।।
विनती यह स्वीकार करो माँ,
हाथ सबके सिर धरो माँ।
सत्य मार्ग दिखला देना माँ,
अपना मुझे बना लेना माँ।।
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लेखिका के बारे में-
नीलम पेड़ीवाल “विहांगी”
हिंदी साहित्य जगत की एक सशक्त, बहुमुखी एवं सक्रिय रचनाकार हैं। राजस्थान की सांस्कृतिक धरती से संबंध रखने वाली तथा वर्तमान में जमशेदपुर (झारखंड) निवासी नीलम जी शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रही हैं। हिंदी एवं संस्कृत की शिक्षिका होने के साथ-साथ वे साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं।कविता, दोहा, चौपाई, मुक्तक, कहानी, लघुकथा, भजन, आलेख, संस्मरण, जीवनी और रिपोर्ट लेखन जैसी विविध विधाओं में उनकी सृजनशीलता समान रूप से मुखर होती है। उनकी रचनाएँ अनेक प्रतिष्ठित साझा काव्य संकलनों, साहित्यिक पत्रिकाओं एवं समाचार-पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं। “यादों का पिटारा”, “दोहे मन को मोहे”, “आरोहण”, “शिवायन”, “वैचारिकी”, “राम का गुणगान”, “मेरी प्रतिनिधि कविताएँ”, “छंदमाल्य सप्त” तथा “अजेय वीरांगनाएँ” जैसे संकलनों में उनकी साहित्यिक उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है। साहित्य साधना के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है, जिनमें तुलसी जयंती साहित्यकार सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान, अहिल्याबाई होलकर साहित्य सेवी सम्मान, साहित्य साधक सम्मान तथा साहित्योदय शिवायन सम्मान प्रमुख हैं। शिक्षा, साहित्य, नाटक, स्लोगन लेखन, पाककला एवं रिपोर्टिंग जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उन्हें सम्मान प्राप्त हुए हैं।
उनकी साहित्यिक यात्रा की एक विशिष्ट उपलब्धि “कृष्णायन अखंड काव्यार्चन” कार्यक्रम के माध्यम से लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होना है। संवेदनशील दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना और सृजनात्मक ऊर्जा से संपन्न उनकी लेखनी पाठकों के मन में विचार, संवेदना और संस्कार का सुंदर समन्वय स्थापित करती है।
