यशोदा-दामोदर

यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे बाल कृष्ण का भावपूर्ण और दिव्य दृश्य।

अंशु गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

दाम से जो बाँध दिया उदर,
कहलाने लगे नंदलाल दामोदर।

डाँट थी यशोदा मैया की,
लीला थी हमारे कन्हैया की।

ऐसे जो वे
रस्सी और ओखल से बंध गए,
मानो जैसे
ब्रह्मांड को चार चाँद लग गए।

छड़ी देखकर
कुंडल हिल रहे हैं,
विश्व में
पुष्प-सरोज खिल रहे हैं।

ये आनंद-कुंड का गोत है,
कृपा-सागर का स्रोत है।

सुसज्जित रूप से
ज़रा लज्जित हो उठे मेरे नेत्र हैं,
कमलरूपी मुख से
मिल रहा जो अपरम्पार सुख है।

नलकूबर और मणिग्रीव की मुक्ति
मिली तभी,
जब प्राप्त हुई हरि-भक्ति।

करुणा-सागर, कर्म-निधान,
भजूँ मैं तुमको
बारंबार।

तुम ही दीप्तिमान,
साथ ही तुम ही श्याम भी…
हाँ, कह देना
जब कहूँ-
आओ ना स्वामी…

आओ ना स्वामी…॥

    8 thoughts on “यशोदा-दामोदर

    1. Waw bhut sundar likhti ho tm
      Jo likhti ho dil ko chu ke ata hai
      Bas likhu ky tumhre likhawat ki tarif kru ky
      Bas smjho ki itna sundar likha h ki me sbdo me iski tarif nhi kar skti
      Aese hi aage badho aur sundar sundar likho
      💗💗

    2. बहुत ही भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी कविता। आपकी लेखनी ने करुणा की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त किया है।

    3. हृदयस्पर्शी काव्य बहुत ही सुंदर🦚❤️

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