प्रेम में राधा मत बनना
प्रेम में स्वयं को खो देना प्रेम नहीं. कृष्ण के संदर्भ में लिखी यह कविता प्रेम, आत्मस्वीकृति और आत्मसम्मान के बीच एक अलग दृष्टि प्रस्तुत करती है.

प्रेम में स्वयं को खो देना प्रेम नहीं. कृष्ण के संदर्भ में लिखी यह कविता प्रेम, आत्मस्वीकृति और आत्मसम्मान के बीच एक अलग दृष्टि प्रस्तुत करती है.
यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।
कुछ लोग नज़रों से दूर हो जाते हैं, मगर दिल से नहीं। यह कविता उसी विरह, स्मृति और लौट आने की उम्मीद का गीत है, जहाँ प्रेम जुदाई के बाद भी सांस लेता रहता है।