खिड़की के पास बैठा उदास व्यक्ति, विरह और प्रतीक्षा के भाव दर्शाता दृश्य।

दीद उसकी

यह ग़ज़ल प्रेम, विरह और प्रतीक्षा की सूक्ष्म अनुभूतियों को शब्द देती है। मीरा, कृष्ण और स्मृतियों के प्रतीकों के माध्यम से प्रेम की पीड़ा और गहराई को सुंदर ढंग से व्यक्त किया गया है।

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यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे बाल कृष्ण का भावपूर्ण और दिव्य दृश्य।

यशोदा-दामोदर

यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।

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विरह में डूबी एक स्त्री, दूर जाती परछाईं को निहारती हुई, आँखों में प्रेम और प्रतीक्षा का गहरा भाव।

नज़र से जुदा

कुछ लोग नज़रों से दूर हो जाते हैं, मगर दिल से नहीं। यह कविता उसी विरह, स्मृति और लौट आने की उम्मीद का गीत है, जहाँ प्रेम जुदाई के बाद भी सांस लेता रहता है।

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