यशोदा-दामोदर
यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।

यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।
हनुमान जी को माता-पिता समान मानकर यह कविता उनके संरक्षण, दया और शक्ति की प्रार्थना करती है, जहां भक्त जीवन के दुखों से पार लगाने की विनती करता है.